आप हैजर्ड लाइट्स का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, यहाँ जानिये सही तरीका!

हैजर्ड लाइट्स (कार के दोनों इंडिकेटर एक साथ जलाने वाली लाइट्स) सभी कार्स पर अनिवार्य हैं और अब वो कुछ बाइक्स में भी आने लगी हैं. लेकिन क्या आपको पट अहै की 90% लोग इन लाइट्स का इस्तेमाल गलत तरीके से करते आये हैं?

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लेकिन कैसे?

ये समझना ज़रूरी है की हैजर्ड लाइट्स को कहाँ और कैसे इस्तेमाल किया जाए. हैजर्ड लाइट्स इस इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए जब आपकी गाड़ी रुकी हुई हो (रोड के किनारे खड़ी हो), या टक्कर के बाद खतरनाक स्थिति में ही या फिर अगर आपकी गाड़ी रोड पर ख़राब होकर फँस गयी है.

इन्हें इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

भारत में इन लाइट्स के प्रयोग का तरीका असल में काफी हास्यास्पद है, अधिकांश लोग सुरंग में घुसते वक़्त, बारिश में, ये धुंध में इनका इस्तेमाल करते हैं. हालांकि अधिकांश लोग ऐसा ही करते हैं, ये गलत है.

जैसा की हमने ऊपर बताया है, हैजर्ड लाइट्स को इस्तेमाल करने का मुख्य मकसद होता है रुकी हुई गाड़ी की चेतावनी देना. कार के चलते हुए या कम विसिबिलिटी के दौरान इनके इस्तेमाल का मतलब है की बाकी लोग इससे भ्रमित होंगे.

साथ ही अगर आप गाड़ी चला रहे हैं और हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ज़ाहिर तौर पर आपके इंडीकेटर्स काम नहीं करेंगे. इसका मतलब है की आपके दिशा बदलने की सूरत में आपके आसपास के ड्राइवर्स को कोई जानकारी नहीं मिल पाएगी जिससे आप बेहद खतरनाक स्थिति में आ सकते हैं.

हाँ, कुछ कार्स इंडीकेटर्स ऑन करने पर हैजर्ड लाइट्स अपने आप बंद कर देती हैं, (जैसे VW की कार्स), लेकिन हर कार में ऐसा नहीं होता.

अगर आप इन्हें ऑन कर ड्राइव करते हैं तो क्या खतरे हैं?

आपके आसपास के लोग ये नहीं समझ पाएंगे की आप लेन कब बदल रहे हैं या आपको कब मुड़ना है. अगर आपको मुड़ना होगा या लेन बदलना होगा तो आपके आसपास के ड्राईवर भ्रमित होकर अपना संतुलन खो सकते हैं.

चूंकि हैजर्ड लाइट्स का सही इस्तेमाल गाड़ी के स्थिर होने की मुद्रा बताना होता है, जिन लोगों को इसके सही इस्तेमाल के बारे में पता है वो सोचेंगे की आपकी गाड़ी खड़ी है जिससे भ्रम पैदा हो सकता है.