देखिये एक Mahindra Scorpio और एक छोटी Suzuki Gixxer SF के रेस में कौन है विजेता…

जहां 0-100 किमी/घंटे तक पहुँचने में लगने वाला समय आपको एक गाड़ी के एक्सीलीरेशन के बारे में बहुत कुछ बताता है, ड्रैग रेस आपको वहीँ के वहीँ नतीजा दे देते हैं. बाइक्स और कार्स के बीच काफी वाद-विवाद चलता रहता है और चलता ही रहेगा. लेकिन जब बात एक्सिलीरेशन की आती है तो बाइक्स की विजेता बनती हैं और इसके पीछे कई कारण हैं. पेश है एक और विडियो जो ऐसा ही कुछ दर्शाता है.

Mahindra Scorpio बनाम Suzuki Gixxer SF ड्रैग रेस

https://youtu.be/5LHuPc0KFDA

Yashrajsinh Gohil के इस विडियो में एक Mahindra Scorpio और एक छोटी Suzuki Gixxer SF के बीच में ड्रैग रेस होती है. इस विडियो को एक खाली सड़क पर फिल्माया गया था. इस विडियो में आप Scorpio के S10 ट्रिम को देख रहे हैं जिसमें एक 120 बीएचपी इंजन है जो इसी गाड़ी के ज्यादा पावरफुल 140 बीएचपी वाले वर्शन से कम पॉवर उत्पन्न करता है.

दोनों ही गाड़ियां बिल्कुल स्टॉक नज़र आती हैं. ड्रैग रेस की दूरी के बीच में कोई कैमरा नहीं लगा है इसलिए हमें ये नहीं पता चल पाता की शुरुआत में बाइक और कार के बीच में कितनी दूरी है. लेकिन, अंत में लगा कैमरा दिखाता है की Gixxer SF ने कुछ सेकेण्ड के फासले से Scorpio को पीछे छोड़ दिया है!

Scorpio Vs Gixxer

क्योंकि गाड़ी के स्पीडोमीटर का भी कोई शॉट मौजूद नहीं है तो हम ये नहीं बता सकते की दोनों गाड़ियों की अधिकतम स्पीड क्या है या ड्रैग रेस कितने दूर की थी. क्योंकि एक लम्बी रेस में Scorpio इस बाइक से काफी आआगे निकल गयी होती. छोटी रेस में बाइक की तेज़ एक्सीलीरेशन के चलते बाइक हमेशा जीतती है.

पॉवर और वज़न का अनुपात!

यहाँ सारी बात पॉवर और वज़न के अनुपात की है. Mahindra Scorpio S10 का वज़न लगभग 2,500 किलो है और इसमें एक 2.2-लीटर mHawk डीजल इंजन लगा है जो अधिकतम 120 बीएचपी और 320 एनएम उत्पन्न करता है. ये आंकड़ा बड़ा लगता है लेकिन गाड़ी का पॉवर और वज़न का अनुपात लगभग 47.81 बीएचपी/टन है वहीँ Suzuki Gixxer SF का वज़न केवल 139 किलो है और ये 14.6 बीएचपी उत्पन्न करती है. लेकिन यहाँ पॉवर और वज़न का अनुपात 107.91 बीएचपी/टन हो जाता है जो इस बाइक को शुरुआत में काफी तेज़ रफ़्तार पर ले जाता है. लेकिन कम पॉवर के चलते लम्बी रेस में बाइक हमेशा ज्यादा पॉवर वाले Scorpio से पीछे ही रहेगी.

यही बात परफॉरमेंस कार्स एवं सुपरकार्स पर भी लागू होती है. निर्माता अपनी सुपरकार्स और बाइक्स का वज़न कम से कम रखने की कोशिश करते हैं ताकि उसकी एक्सीलीरेशन ज्यादा हो, पर बाइक हमेशा कार से हल्की होती है और इसलिए एक्सीलीरेशन में बाइक हमेशा आगे रहती है.