कैसे बहादुर क्रेन ऑपरेटर ने बचाई पहाड़ जलधारा में फंसे लोगों की जान, जज़्बे को सलाम!

भारत में मानसून आने के साथ ही कई लोग शहर में अपने गंतव्य तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. लेकिन पहाड़ों में दिक्कत और भी बढ़ जाती है. Himachal Pradesh के Chamba जिला का एक विडियो दिखाता है की जहां एक्सकेवेटर मशीन लोगों को पानी की एक धार पार करने में मदद कर रही है.

यहाँ क्या हो रहा है?

विडियो में पहाड़ों में एक खतरनाक जलधारा को दिखाता है, ये हिमालय के इलाके में मानसून में एक आम चीज़ है. अक्सर, ऐसी जलधार रोड पर से गुज़र रही होती है और ऐसी जगहों को पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है.

इस विडियो में आप Chamba इलाके में ऐसी ही हालत देख सकते हैं हैं जहां कुछ राहगीर तेज़ बहते पानी के धार के एक तरफ फंसे हुए हैं. और एक एक्सकेवेटर जो शायद आसपास के इलाके में भूस्खलन की सूरत में रोड क्लियर करने के लिए तैनात होगा, ने आगे आकर लोगों की मदद की.

इस एक्सकेवेटर को तेज़ी से बहते पानी की धार के पास लोगों के लिए अपने लोडिंग बे को नीचे करते हुए देखा जा सकता है. कुछ लोगों को क्रेन के बैकहो लोडर पर चढ़ उसे पकड़ते हुए देखा गया है. फिर क्रेन ऑपरेटर लोडिंग बे को उठाता है और तेज़ बह रहे पानी को पार कर जाता है. फिर वो लोगों को दूसरी ओर सेफ ढंग से लोगों को बचाता है.

ये विडियो में भले ही एडवेंचर से भरा हुआ लगे, ये एक खतरनाक काम है. तेज़ बहता पानी नीचे की बजरी को ढीला कर देता है और उसपर गाड़ी के चक्के के घूमने से वो फिसल कर गड्ढे में गिर सकती है. साथ ही बहते पानी का दबाव भी क्रेन को नीचे फ़ेंक सकता है. इतने सारे खतरों के बावजूद, क्रेन ऑपरेटर ने तेज़ी से दिमाग चलाया और कई लोगों को बचा लिया. अगर वो उस वक़्त वहां नहीं होता, इन लोगों ने पानी के धार को पैडल ही पार करने की कोशिश की होती और तब कुछ भी हो सकता था.

ऊँचाई से गिर रहे पानी वाली क्रॉसिंग खतरनाक होती है

सैलानियों के Ladakh सीजन के शुरू होने के साथ ही रोड पर चलने वाले कई लोग पहाड़ों पर पानी से पार पाने की चुनौती से दो-चार होते हैं. पिघलती हुई बर्फ रोड पर पानी को तेज़ रफ़्तार से भेजती है और कई लोग बिना सावधानी बरते इसे पार करने की कोशिश करते हैं.

आपको ऐसे पानी वाले क्रॉसिंग के पास हमेशा धीरे हो जाना चाहिए. अगर पानी का बहाव खतरनाक दिख रहा है तो उसके लिए थोड़ी देर ठहर जाना अच्छा होता है. ऐसे पानी की धार सुबह और शाम तापमान कम होने पर धीमी हो जाती है जिससे बर्फ की पिघलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.

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