तेज़ी से मुड़ती Mahindra XUV500 ने बताया की क्यों है ESP इतना महत्वपूर्ण

नए सुरक्षा फीचर्स की वजह से अधिकांश आधुनिक कार्स पुरानी पीढ़ी की कार्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं. इस तरह का एक सेफ्टी फीचर है इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) जो कई किफ़ायती कारों में तेजी से सामान्य होता जा रहा है. Mahindra ने XUV500 — जिसे 2011 में लॉन्च किया गया था — की पहली पीढ़ी के मॉडल से ही ESP पेश किया था. पुरानी पीढ़ी की XUV500 के साथ Bosch Mobility Solutions द्वारा बनाया गया एक विस्तृत वीडियो बताता है कि यह फीचर कैसे काम करता है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है.

यह वीडियो दिखाता है कि ESP कैसे काम करता है और ESP न होने पर वाहन कैसे व्यवहार करेगा. ESP के कई सारे फीचर्स हैं लेकिन इसका मुख्य फीचर वाहन को फिसलने के बचने के साथ-साथ तेज़ गति में नियंत्रण खोने से बचाना है. वीडियो में ESP के बिना Mahindra XUV500 को करतब करते दिखाया गया है जिसमें हम XUV500 को नियंत्रण खोने और रोड पर 360 डिग्री घूमते देखा सकते हैं. बाद में ESP के साथ उसी गति के साथ कार करतब करती है. ESP वाहन को फिसलने और नियंत्रण से बाहर जाने से बचाता है.

ESP ट्रैक्शन कण्ट्रोल, हिल-होल्ड कण्ट्रोल, और हिल-डिसेंट कण्ट्रोल जैसे अन्य कार्य भी करता है. वीडियो में इन सभी फीचर्स को अलग से दर्शाया गया है. ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम की व्याख्या करने के लिए Mahindra XUV500 एक फिसलन वाली सतह पर दो टायरों के साथ एक ढलान पर चढ़ती है. ESP के बिना ऐसी सतह पर टायर फिसलते रहते हैं और वाहन अंततः अनियंत्रित रूप से नीचे आ जाता है. ESP के साथ बाईं ओर के पहिये ट्रैक्शन का पता लगाते हैं और बिना किसी समस्या के ढलान पर चढ़ जाते हैं. यहाँ यह समस्या तब दिखाई गई जब वाहन फिसलन वाली सतह पर एक रुका हुआ है लेकिन इस समस्या का सामना तब भी हो सकता है जब वाहन फिसलन वाली सतह पर चल रहा हो. ESP सिस्टम सतह से पकड़ बनाये रखने के लिए प्रत्येक पहिया पर टॉर्क को नियंत्रित करता है.

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ESP की अन्य विशेषताओं में हिल-होल्ड कंट्रोल शामिल हैं. यह फीचर ढलान वाली सतह पर रुकने के बाद फिर से आगे जाने पर हैंडब्रेक का उपयोग करने की आवश्यकता को समाप्त करता है. ESP का हिल्ड-होल्ड फीचर इस बात का पता लगाता है कि वाहन एक ढलान पर है और खुद ही 2 सेकंड तक ब्रेक को लगाये रहता है जिससे हैण्डब्रेक लगाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है. ESP में हिल-डिसेंट प्रणाली भी है जो एक ढलान से नीचे आते समय वाहन की गति को बनाए रखती है. हिल-डिसेंट प्रणाली स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है जिससे ढलान पर वाहन नियंत्रण से बाहर न जाए और चालक को केवल वाहन को सुरक्षित रूप से चलाने पर ध्यान केंद्रित करना पड़े.

ESP में कई घटक होते हैं जो वाहन को सुरक्षित रखने के लिए एक साथ काम करते हैं. इसमें विभिन्न सेंसर होते हैं जैसे स्टीयरिंग इनपुट सेंसर, वाहन के सभी पहियों पर सेंसर, वाहन के बीच में रोटेशन सेंसर, आदि. एक सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के जरिये डेटा इकट्ठा किया जाता है. इस सिस्टम में एक हाइड्रोलिक प्रणाली भी होती है जो स्थिति के आधार पर ब्रेक का खुद से इस्तेमाल करती है. वीडियो यह भी दिखाता है कि वाहन को नियंत्रण में रखने के लिए ESP व्यक्तिगत पहियों पर ब्रेक लगाने का काम कैसे करता है.