ये 5 विडियो बताते हैं की भारत में बाइकर्स पुलिस से नफरत क्यों करते हैं!

सभी बाइकर्स का कभी ना कभी पुलिस से सामना ज़रूर हुआ होगा. अकसर पुलिस अपना काम सही से करती है और सड़कों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखती है. लेकिन, ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहां इसका ठीक उल्टा भी हुआ है. बाइकर्स को झूठे इल्जामों के अलावे तर्कहीन कारणों के तहत पकड़ा गया है. यही कारण है की देशभर में बाइकर्स के बीच पुलिस की छवि कुछ ख़ास अच्छी नहीं है. पेश हैं ऐसे ही 5 मामले जहां पुलिस के प्रति बाइकर्स का गुस्सा तर्कसंगत लगता है. लेकिन इस बात को ध्यान में रखियेगा की हर पुलिसकर्मी ऐसे बेतुके हरकत नहीं करता, कुछ पुलिस वाले ही ऐसे हैं जिनके चलते पूरे डिपार्टमेंट का नाम खराब होता है.

55 किमी/घंटे चलने पर तेज़ रफ़्तार का चालान!

सबसे पहले सबसे आम दिक्कत की बात करें तो इस बाइकर को पुलिस ने रास्ते में रोक लिया और फिर एक पुलिसकर्मी उसके पीछे की सीट पर बैठ उसे पुलिस स्टेशन ले गया. पुलिस के मुताबिक़, राइडर तेज़ रफ़्तार पर चल रहा था इसलिए उसे चालान के लिए रोक लिया गया. लेकिन विडियो के मुताबिक़, हम देख सकते हैं की राइडर अधिकतम 55 किमी/घंटे की रफ़्तार तक ही पहुंचा था जो स्पीड लिमिट के अन्दर है. बाद में जब पुलिस को कैमरे के बारे में पता चला तो उसे छोड़ दिया गया लेकिन फिर भी उसे थोड़ा जुर्माना तो भरना ही पड़ा.

फैक्ट्री फिटिंग वाले LED लैम्प्स गैरकानूनी हैं!

ये वाक्या हाल ही में हुआ था. यहाँ कोलकाता में पुलिस ने एक TVS Apache RR310 मालिक पर उनके बाइक के फैक्ट्री फिटिंग वाले LED हेडलैम्प्स के लिए जुर्माना ठोंक दिया. उनके मुताबिक़ ये गैरकानूनी हैं क्योंकि ये अपनी रौशनी से बाकी लोगों को चकाचौंध कर एक्सीडेंट का कारण बनते हैं. लेकिन यहाँ पुलिस कर्मी बेहद बेवकूफी भरी बात कर रहा है. राइडर कहता भी है की उसकी बाइक पर लगे ये LED हेडलैम्प्स फैक्ट्री से लगे आते हैं और उसे RTO की स्वीकृति प्राप्त है. आपको बता दें की मार्केट में बिकने वाली कोई भी गाड़ी सारे नियमों का पालन करती है. इसलिए बाइक के हेडलाइट्स के गैरकानूनी होने के कोई सवाल ही नहीं उठता. बाद में कैमरा बंद कर दिया जाता है पर उसके पहले 100 रूपए का चालान कटता है.

सुरक्षा गियर पहन कर चलना मतलब रेसिंग और स्टंटिंग

अपनी सुर्काह्सा को लेकर सजग रहने वाले बाइकर्स को सुरक्षा गियर की अहमियत पता होती है. पर पुलिस का इसके बारे में दूसरा ही ख़याल है. उन्हें लगता है की सुरक्षा गियर पहनने वाले बाइकर्स रेसिंग या स्टंट करने निकले हैं. लेकिन, यहाँ विडंबना ये है की यहाँ जिस राइडर पर ये इल्जाम लगाया गया वो एक Honda Navi चला रहा था वहीँ बाकी दो बाइक्स Hero Passion और Royal Enfield Classic थीं. पुलिस कहती है की चूंकि वो राइडिंग जूते और हेलमेट पहने हुए थे तो वो ‘राइडिंग’ कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक़ राइडिंग का मतलब रेसिंग या स्टंट होता है और उन्होंने विडियो में भी इस शब्द को इसी सन्दर्भ में इस्तेमाल किया है.

अपनी गलती लेकिन जुर्माना बाइकर्स पर

ये विडियो एक बार फिर पुलिस की बाइकर्स के प्रति आक्रामकता को दर्शाता है. विडियो में बाइक चला रहे दो लोगों को पुलिस ट्रैफिक के नियम तोड़ने के लिए रोकती है. असल में हुआ ये था की बाइकर पीछे से चला आ रहा था और पुलिस की कार अचानक मुड़ गयी. अगर आप विडियो को देखेंगे तो पायेंगे की गलती पुलिस की थी क्योंकि उन्होंने कार को अचानक से मोड़ दिया था. गुस्साई पुलिस उन्हें रोक कर थाने चलने को कहती है. लेकिन इस घटना के कैमरा में कैद होने की बात जानकर उनका गुस्सा ठंडा हो गया. उसके बाद वहां मौजूद ऑफिसर ने बाइकर्स से माफ़ी ली, और फिर पुलिस वहां से चलती बनी.

हेल्मेट पर एक्शन कैमरा लगाना गैरकानूनी है!

Is this Justice guys😶 ?kerala police says using action camera on bikes are illegal😂😂. Got harrased enough just for carrying a gopro😫😫 ..

Muhammed Ismail M ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಅಕ್ಟೋಬರ್ 11, 2017

इस मामले में पुलिस ने राइडर को एक बैरिकेड पर रोका. फिर उन्हें हेल्मेट पर लगा हुआ GoPro दिखा और उनकी उत्सुकता बढ़ गयी. पुलिसकर्मी अपने सीनियर को कैमरा के बारे में बताता है और कहता है की हर कुछ रिकॉर्ड हो रहा है. इसपर वैन में बैठा सीनियर पुलिस अफसर राइडर को बुलाकर हेलमेट उतारने को कहता है. पुलिस अफसर हेल्मेट हाथ में लेकर उसे हर तरफ से परखता है. फिर केरल पुलिस का ये अफसर कहता है की मोटरसाइकिल पर कैमरा इस्तेमाल करना या रिकॉर्डिंग गैरकानूनी है. वो मोटरसाइकिल में किये गए बदलाव के बिनाह पर चालान काटने की धमकी भी देता है. लेकिन थोड़े बहस के बाद, पुलिस कैमरा के बदले मोटरसाइकिल में रियर-व्यू मिरर ना होने का चालान काटती है.