ये 5 ड्राइविंग आदतें आपके इंजन पर बुरा असर डाल रही हैं

हर मशीन की तरह ही कार्स को भी सही से चलने के लिए केयर और मेंटेनेंस की ज़रुरत होती है. अगर सारे पार्ट्स को देखें को इंजन को हम कार का दिल कह सकते हैं. ये कार का सबसे जटिल पार्ट होता है और यही कार को पॉवर भी देता है. आमतौर पर इंजन को काफी रफ-टफ होने के लिए बनाया जाता है लेकिन इसकी लाइफ बढाने और इसे अच्छे से चलते रहने देने के लिए इसकी कुछ सीमाएँ होती हैं.

अनजाने में कई ड्राईवर रोजाना ऐसी गलतियां करते हैं जो इंजन पर बुरा असर डालती हैं. पेश हैं ऐसी ही 5 सबसे आम गलतियां जो आपके इंजन के लाइफ को कम कर रही हैं.

कोल्ड स्टार्ट के बाद इंजन को काफी ज़्यादा रेव करना

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लगातार कोल्ड स्टार्ट या एक लम्बे समय के बाद इंजन स्टार्ट करने से उसपर काफ़ी ज़ोर पड़ता है. कोल्ड स्टार्ट के दौरान इंजन इंटरनल कम्बशन वाले पार्ट्स को अच्छे ढंग से लुब्रीकेट नहीं कर पाता. इसलिए, अगर एक कोल्ड स्टार्ट के बाद आप अपने इंजन को ज़्यादा रेव करें तो इसके मूविंग पार्ट्स के डैमेज होने की संभावना बढ़ जाती है. ये इंजन की लाइफ पर असर डालता है. इसलिए, इंजन के गर्म होने का इंतज़ार करना बेहतर होगा. और साथ ही, कोल्ड स्टार्ट करने के कुछ देर बाद तक अपने इंजन स्पीड को पहले 2 किलोमीटर तक 2,000 आरपीएम से कम रखें.

इंजन खींचना

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अक्सर आचेह ड्राइवर्स भी ऊंचे गियर में गाड़ी खींचने की गलती कर बैठते हैं. इस गलती में अक्सर ड्राईवर इंजन के ऊंचे गियर में कम आरपीएम पर पूरा एक्सीलीरेटर देते हैं. ऐसा अक्सर तब होता है जब आपके सामने की गाड़ी धीमी हो जाती है और आपको अपनी गाड़ी को दूसरे लेन में ले जाना होता है. इससे आपके इंजन पर बुरा असर पड़ता है, भले ही आपकी गाड़ी टर्बोचार्ज्ड ना हो, तो भी. जब आप ये गलती करते हैं तो आपके इंजन पर ज़्यादा जोर पड़ता है. इससे इसकी माइलेज कम होती है और इंजन का तापमान बढ़ता है. इसीलिए इंजन स्पीड कम होने पर हमेशा गियर बदल लें और रेव को मिलाने की कोशिश करें.

गाड़ी के ऑइल बदलाव और मेंटेनेंस में देर

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जैसे इंसानों के शरीर में खून दौड़ा करता है, कार के इंजन में बेहद ज़रूरी पार्ट्स में इंजन ऑइल दौड़ा करता है. इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा की इंजन ऑइल किसी भी कार इंजन का खून होता है. लेकिन, हमारे शरीर के खून के उलट इंजन खुद से ऑइल का निर्माण नहीं करते और इसलिए इन्हें एक अंतराल के बात बदलना पड़ता है. निर्धारित समय पर इंजन ऑइल नहीं बदलने से आपके कार के इंजन को काफी ज़्यादा नुक्सान पहुँचता है. ये ज़रूरी है की आप कार निर्माता के द्वारा इंजन ऑइल के बदलने के समय का पालन करें. समय पर पुराना ऑइल नहीं बदलने से इंजन के कई पार्ट्स में काफी ज़्यादा टूट-फुट होती है. साथ ही इंजन ऑइल के लेवल को भी कुछ समय पर मापते रहे, इंजन में कम ऑइल होना भी आपके कार के इंजन को डैमेज करता है.

क्लच दबाये रहना

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मैन्युअल कार में ड्राईवर को अक्सर ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है क्योंकि क्लच का लगातार इस्तेमाल भी गाड़ी चलने के लिए ज़रूरी हो जाता है. क्लच किसी भी कार में इंजन और गियरबॉक्स के बीच लिंक की तरह काम करता है. क्लच का सही उपयोग इंजन की लम्बी उम्र, अच्छे माइलेज, और गियरबॉक्स में किसी खराबी से बचने के लिए ज़रूरी है. कुछ लोग गियर बदलते वक़्त क्लच को अच्छी तरह नहीं दबाते हैं जिससे इसमें जल्द ही खराबी आने की सम्भावना बढ़ जाती है. क्लच पूरा ना दबाने पर कार के अन्य हिस्सों को भी नुक्सान पहुँचता है और इससे कार की सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही अगर कार पहले से चल रही है और फिर आप आधा क्लच दबाते हैं तो इंजन को काफी गहरा नुक्सान हो सकता है. क्लच दबाये रहना भी एक बड़ी गलती है, भारी ट्रैफिक में अक्सर नए ड्राईवर ये गलती करते हैं. इससे क्लच प्लेट को नुक्सान पहुँचता है और इसे काफी ज़्यादा क्षति पहुँचती है.

ड्राइव खत्म होते ही टर्बो इंजन को बंद कर देना

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टर्बोचार्जिंग के ज़रिये गाड़ी के छोटे इंजन भी अच्छे माइलेज के साथ बेहतर आउटपुट दे पाते हैं. यही कारण है की कई कार्स, खासकर डीजल इंजन वाली कार्स में टर्बोचार्जर लगा होता है. लेकिन अगर आपके पास टर्बोचार्ज्ड कार है तो आपको इसे एक लम्बे ड्राइव के तुरंत बाद नहीं बंद करना चाहिए. या तो गंतव्य तक पहुँचने से पहले अपनी स्पीड कम कर लें या पहुँच कर इंजन को थोड़े देर चलते रहने दें ताकि टर्बो ठंडा हो जाये. टर्बो रिपेयर काफी महंगा होता है इसलिए अगली बार काफी समय तक ड्राइव करने के बाद कार को थोड़ी देर बस खड़ी हालत में चलते रहने दें. ऑइल कूलिंग वाली डीजल इंजन कार्स पर इससे सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है और भारत में अधिकांश कार्स में यही टर्बो ऑफर किया जाता है.