10 बातें जो भारत में सुपरबाइक्स खरीदते वक़्त आपको कोई नहीं बताएगा

भारत में कई लोगों के लिए सुपरबाइक खरीदना एक सपने की तरह है क्योंकि इनकी कीमत काफी अधिक होती है. मगर यह भी एक सच्चाई है की ये कई महंगी कार्स से कहीं सस्ती होती हैं. इसलिए सुपरबाइक का सपना पूरा करना जितना आपने सोचा था उससे कहीं ज्यादा आसान है! मगर इस देश में सुपरबाइक चलाने के बारे में कुछ बातें ऐसी हैं जो आप खरीदने से पहले ही जान लें तो बेहतर होगा.

अत्याधिक गर्मी

सुपरबाइक्स में लगातार ही हवा के बहाव की जरूरत होती है ताकि इनसे उतपन्न होने वाली गर्मी को कम किया जा सके. भारत में जिस तरह का ट्रैफिक होता है उसे देखते हुए हवा का लगातार बहाव नामुमकिन है और सुपरबाइक्स चलाने वोलों को इंजन से निकलने वाली गर्मी की मार झेलनी पड़ती है. कार की तुलना में किसी भी बाइक का इंजन चालक के काफी करीब भी होता है. भारतीय सड़कों पर चलने वाली अधिकतर बाइक्स के इंजन से भी गर्मी पैदा होती है पर छोटे इंजन की वजह से इसका पता नहीं चलता. जब बात सुपरबाइक्स की आती है तो ट्रैफिक जाम मुसीबत साबित होता है.

हैंडलिंग

सुपरबाइक एक साधारण मोटरसाइकिल से कहीं अधिक भारी होती है और बाइक चलाने वाला काफी खतरनाक पोजीशन में होता है. कम स्पीड पर किसी भी चालक को सुपरबाइक चलाना काफी कठिन साबित हो सकता है और भारत की भीड़-भाड़ वाली सड़कें इस काम में सुपरबाइक मालिक की कोई मदद नहीं करेंगी. यही वजह है की देश में अधिकतर सुपरबाइक्स या तो तड़के सुबह या देर रात में ही दिखाई देती हैं.

ईधन

सुपरबाइक्स काफी आधुनिक इंजन का इस्तेमाल करती हैं जो बुरे से बुरे हालत में भी चलने के लिए बने होते हैं. ऐसे इंजन काफी तेज़ गति पर चलते हैं और इन्हें काफी उच्च गुणवत्ता का ईधन चाहिए होता है. इन सभी सुपरबाइक्स में 95 RON ईधन का इस्तेमाल होता है जो की भारत में उपलब्ध नहीं है. अगला सबसे बेहतरीन विकल्प है 97 Octane मगर ये भी भारत में कम ही स्थानों पर उपलब्ध है. कम गुणवत्ता वाले ईधन का इस्तेमाल सुपरबाइक के इंजन पर बुरा प्रभाव डालता है और इससे बाइक की लाइफ भी कम होती है.

टायर्स

सुपरबाइक्स सॉफ्ट कंपाउंड टायर्स का इस्तेमाल करती हैं ताकी रोड पर बाइक की ग्रिप बनी रहे. इस तरह के टायर्स सुनिश्चित करते हैं की बाइक की परफॉरमेंस हमेशा सर्वाधिक रहे. मगर ऐसे टायर्स की लाइफ तकरीबन 10,000 किलोमीटर ही होती है और इनके रिप्लेसमेंट काफी महंगे होते हैं. इतना ही नहीं, भारत में ऐसी बाइक्स की कम संख्या के चलते ये टायर्स आसानी से उपलब्ध भी नहीं होंगे.

पार्किंग नहीं आसान

जहाँ भारत में महंगी कार्स और बाइक्स पार्क करने का मतलब है सबका ध्यान आकर्षित करना और साथ ही भीड़ जमा होने का खतरा मोल लेना, सुपरबाइक्स पार्क करने में और भी कई सारी दिक्कतें सामने आती हैं. इस देश में सुरक्षित पार्किंग ढूंढना टेड़ी खीर साबित हो सकता है. आम लोग ऐसी बाइक्स को देख कर इनके साथ फोटो लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं और अक्सर बाइक को नुक्सान पहुंचा देते हैं. भारत में खुलेआम ऐसी बाइक्स पार्क करना खतरे से खली नहीं है.

और बेहतरीन विकल्प हैं मौजूद

भारत की सड़कों के हालत देखते हुए यहाँ कुछ ख़ास तरह की बाइक्स ही सफल हो सकती हैं. सड़कों पर गड्डे, अत्यधिक धूल, और चुनौतीपूर्ण हालात इन सुपरबाइक्स के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. मगर कुछ अन्य एडवेंचर मोटरसाइकल्स भारत में हैं जो यहाँ की सड़कों पर बेहतरीन प्रदर्शन के साथ साथ सुपरबाइक जैसा मज़ा भी दे सकती हैं. उदाहरण के लिए Triumph Tiger, Ducati Multistrada, BMW RGS सीरीज. इतना ही नहीं, Triumph Bonneville और Harley-Davidson Street 750 जैसी बाइक्स भी देश में काफी कामयाब रहीं हैं.

राइडिंग गियर

भारत में ऐसे भी उदाहरण हैं जहाँ सुपरबाइक्स पर चालकों को बिना हेलमेट और राइडिंग गियर के देखा गया है. दुर्घटना किसी भी बाइक पर हो सकती है और भारत जैसी सड़कों पर सुरक्षा गियर हर टू-व्हीलर चालक को इस्तेमाल करना चाहिए. मगर सुपरबाइक्स के मामले में तो ये और भी ज्यादा ज़रूरी है. सुपरबाइक्स मालिकों को अच्छे हेलमेट, बूट्स, ग्लव्स, जैकेट, और राइडिंग पैन्ट्स हमेशा पहनने चाहियें. I

उत्तम राइडिंग स्किल्स

सुपरबाइक्स बहुत ही पावरफुल होती हैं और इनको चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है. सुपरबाइक्स चालाने के लिए उच्च-स्तर की ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है. कम गति पर सुपरबाइक चला कर इससे जुड़े खतरे कम किये जा सकते हैं पर ऐसी बाइक्स का मज़ा तभी है जब आप पूरी पॉवर का इस्तेमाल करें और इसको नियंत्रण करना आपको आता हो. भारत में कुछ ऐसे स्कूल हैं जहाँ सुपरबाइक्स चालकों को प्रशिक्षण दिया जाता है. ऐसा एक स्कूल IndiMotard Two है. इतना ही नहीं, विश्व स्तर पर मशहूर California Superbike School भी भारत में साल में दो बार अपना शिविर लगाता है.

अवांछित ध्यान

सुपरबाइक्स वाकई में काफी लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं मगर इसके कई नुक्सान भी हैं. लोग सड़को पर आपका बेवजह पीछा करेंगे और आप पर फालतू के सवालों की बौछार करेंगे. इनसे बचकर रहने में ही भलाई है क्योंकि ज्यादर दुर्घटनाएं ऐसे ही लोगों की वजह से होती हैं.

रख-रखाव

ऐसी हाई-परफॉरमेंस बाइक्स के रख-रखाव में काफी खर्चा आता है. कुछ सुपरबाइक्स भारत में असेम्बल ज़रूर होती हैं मगर तकरीबन सभी ऐसी बाइक्स के पार्ट्स विदेश से आयात किये जाते हैं. इसमें काफी खर्चा आता है और समय की बर्बादी भी होती है. साथ ही भारत की कठिन सड़कों की वजह से सुपरबाइक्स की जल्दी-जल्दी सर्विस करवानी पड़ती है जिसमें काफी पैसा बर्बाद होता है. अगर गाड़ी का कोई पुर्जा ख़राब होता है तो उसको रिप्लेस करने में हफ्तों लग सकते हैं. इसीलिए बेहतर यही होगा की आप Suzuki, Triumph, या Harley-Davidson की सुपरबाइक्स खरीदें जो भारत में आसानी से पार्ट्स उपलब्ध कराते हैं.