ऑटोमैटिक कार्स के बारे में 10 बातें जो आपको कोई नहीं बताता

इंडिया में ऑटोमैटिक कार्स तेज़ी से पोपुलर हो रही हैं. फिर भी हमारा कार मार्केट अब भी मैन्युअल ट्रांसमिशन इक्विप्ड कार्स डोमिनेट करती हैं. इसलिए ऑटोमैटिक को ड्राइव करना लोगों को मैन्युअल कार ड्राइव करने से काफी अलग लगता है. हम लेकर आये हैं कुछ टिप्स जो एक ऑटोमैटिक गाड़ी चलाने में आपकी मदद कर सकते हैं.

याद रहे, बांया पैर हर वक़्त डेड पेडल पर बना रहना चाहिए

ध्यान रहे, ऑटोमैटिक कार ड्राइव करते वक़्त आपको अपना बांया पैर इस्तेमाल नहीं करना है. ये काफी आसान है. एक मैन्युअल कार में आप एक्सेलरेटर और ब्रेक के लिए आप अपना दांया पैर इस्तेमाल करते हैं. ऑटोमैटिक में भी यही है. और बांया पैर डेड पेडल पर रेस्ट कर सकता है क्योंकि इसमें ऑपरेट करने के लिए क्लच पेडल नहीं है. कुछ ड्राइवर्स ‘लेफ्ट-फूट ब्रेकिंग’ करने लगते हैं. ये बहुत गलत प्रैक्टिस है और इसे अवॉयड करना चाहिए. बांये पैर से ब्रेक करने से, जबकि आपका दांया पैर अब भी एक्सेलरेटर पर हो, कार नियंत्रण से बाहर जा सकती है. दांये पैर से एक्सेलेरेशन और ब्रेकिंग दोनों के लिए दांये पैर के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. और डेड पेडल पर रखने के बाद अपने बांये पैर को भूल जाइये!

न्यूट्रल में डाउनहिल न जाना

ऐसा करने से आपसे कुछ कण्ट्रोल छूट जाता है क्योंकि आप न्यूट्रल मोड में एक्सेलेरेट नहीं कर सकते और सिर्फ ब्रेक पेडल के ज़रिये ही स्लो डाउन कर सकते हैं. इसके इलावा, एक्सेलेरेट करना शुरू करने के लिए ‘D’ में शिफ्ट करने से पहले आपको गाड़ी रोकनी पड़ेगी जो की स्लोप पर काफी मुश्किल होगा. मॉडर्न-डे ऑटोमैटिक्स डाउनवार्ड स्लोप पर फ्यूल सप्लाई कट कर देते हैं इसलिए आपको फ्यूल बचाने के लिए न्यूट्रल पर शिफ्ट करने की ज़रुरत असल में नहीं होती है.

कार के रुकने के बाद ही N पर शिफ्ट करें

हमारी सलाह है की आप N (या R) पर पूरी तरह रुकने के बाद ही शिफ्ट करें. क्योंकि कार के मोशन में होने के दौरान न्यूट्रल पर शिफ्ट करने से ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन बैंड का बहुत ज्यादा वियर एंड टियर होता है. इसलिए पूरी तरह रुकने पर ही गियर लीवर को शिफ्ट करें.

कार को हमेशा P मोड में पार्क करें

कार को हमेशा गियरशिफ्ट सेलेक्टर लेवेल पर P (पार्क) पोजीशन में छोड़ें. ये इसलिए ज़रूरी है क्योंकि गाड़ी हैण्डब्रेक लूज़ या इनइफेक्टिव होने की स्थिति में रोल-ऑफ कर सकती है.

हमेशा हैण्डब्रेक इस्तेमाल करें

याद रखें, गियर लीवर को P मोड में छोड़ना हैण्डब्रेक का विकल्प नहीं है. हैण्डब्रेक लगाना और सिर्फ पार्क मोड पर निर्भर न करना बेस्ट है. क्यों? हैण्डब्रेक की स्टॉपिंग फ़ोर्स पार्क मोड से कहीं ज्यादा होती है. इसलिए स्लोप पर कार को P मोड पर छोड़ने से कार न सिर्फ रोल कर सकती है बल्कि ये ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की उम्र के लिए भी अच्छा नहीं है.

परफॉरमेंस में बदलाव के प्रति सावधान रहें

एक ही कार के मैन्युअल और ऑटोमैटिक मॉडल्स के परफॉरमेंस में फर्क पर हैरान न हों. इसके इलावा, अच्छी खासी सम्भावना है की AT वेरिएन्ट्स मार्जिनली क्विकर और और भी तेज़ हों. ऐसा ऑटो ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजीज़ में एडवांसमेंट की वजह से है. कुछ ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन इक्विप्ड ऑटोमैटिक कार्स अपने मैन्युअल वेरिएन्ट्स से काफी ज्यादा कविकर होती हैं. इसलिए कार में बैठ कर एक्सेलेरेटर को गियर लीवर D मोड में डालते ही फ्लोर करना अच्छा नहीं है.

ऑटोमैटिक्स अब ऑफर करती हैं बेहतर माइलेज

वो दिन गए जब ऑटोमैटिक वेरिएंट अपने मैन्युअल काउंटरपार्ट्स से ज्यादा महंगे साबित होते थे. आज, टेक्नोलॉजी के एडवांसमेंट की वजह से ऑटोमैटिक कार्स अक्सर अपने मैन्युअल काउंटरपार्ट्स से ज्यादा किफायती साबित होती हैं. ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन और AMT इक्विप्ड ऑटोमैटिक कार्स लगभग हमेशा अपनी मैन्युअल काउंटरपार्ट्स से ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट होती हैं.

सब ऑटोमैटिक्स एक जैसी नहीं होतीं

अलग अलग ऑटोमैटिक्स का स्वभाव अलग होता है. जैसे, AMT कार्स को ट्रैफिक लाइट्स पर न्यूट्रल में डालने की ज़रुरत होती है. दूसरी ऑटोमैटिक्स पर ये करना ज़रूरी नहीं होता. एक और उदाहरण है CVT जिसमें एक टिपिकल रबर बैंड इफ़ेक्ट होता है जो और दूसरी तरह की ATs में नहीं होता. इसलिए अच्छा ये है की आप अपनी कार की ऑटोमैटिक ट्रैनी का स्वभाव पहचानें उसे पूरी तरह एक्स्प्लोर करने की प्लानिंग करने से पहले.

MTs और ATs के बीच में फर्क समझना

MT से एक AT कार की ओर शिफ्ट करते हुए हमेशा टार्क, डिलीवरी/एक्सेलेरेशन में बदलाव से अभ्यस्त होने का वक़्त लें. जहाँ कुछ ATs MTs जितनी क्विक नहीं होतीं, कुछ ज्यादा क्विक होती हैं. इसलिए ओवरटेक करने में शुरुआत में कुछ गणित करना पड़ सकता है.

AT कार को टो करने का सही तरीका

याद रहे, आपकी कार के पावर्ड व्हील्स को टो होते हुए कभी भी रोड से कांटेक्ट में नहीं होना चाहिए. जैसे की, फ्रंट व्हील ड्राइव कार के फ्रंट व्हील्स हवा में होने चाहिए जबकि रियर व्हील्स रोड पर छोड़े जा सकते हैं. दूसरी ओर, रियर व्हील ड्राइव कार पर इसका उल्टा होना चाहिए. पावर्ड व्हील्स को रोड पर छोड़ कर कार को टो करने से ट्रांसमिशन को एब्नार्मल और एक्स्सेसिव वियर एंड टियर झेलना पड़ सकता है.