13 साल बाद भी एकदम से चल पड़ा इस Standard 2000 का इंजन; ये होता है भरोसा!

Standard 2000 भारत की एक ऐसी कार है जिसे आज ज़्यादा लोग याद नहीं रखते. असल में ये कार एक Rover SD1 हुआ करती थी और इसे भारत में 1985 से 1988 के बीच चेन्नई की ऑटो निर्माता Standard Motor Products of India Limited बनाया करती थी. लेकिन Standard 200 में Rover SD1 का असल इंजन नहीं बल्कि एक काफी पुराना 2.0-लीटर इंजन मिलता था. इसमें ज़्यादा पॉवर नहीं थी लेकिन Retro Classics India के इस विडियो को देखकर पता चलता है की ये भरोसेमंद ज़रूर था क्योंकि आप यहाँ इस 13 साल से बंद पड़े इंजन को चालू होते हुए देख सकते हैं.

https://youtu.be/D-bi7k836B4

Standard 2000 की सफलता का आकलन काफी बढ़-चढ़ कर किया गया था और Indian Ministry of Industry का दावा था की ये देश में इम्पोर्ट की गयी ब्लैक मार्केट कार्स की कीमत कम करने में मदद करेगी. Standard Motor Products of India Limited के पास इस गाड़ी के 4,000 यूनिट्स बनाने की क्षमता भी थी लेकिन ये आंकड़े केवल सपने ही बनकर रह गए. Standard 2000 की कीमत 2,12,000 रूपए थी.

Shandard 2000

Standard 2000 में एक 1,991 सीसी इनलाइन 4-सिलिंडर इंजन था जो अधिकतम 83 बीएचपी उत्पन्न करता था. ये इंजन कार से भी काफी पुराना था और ये सबसे पहले 1948 में British Standard Vanguard में मिला करता था. दरअसल, Standard Motor Products of India Limited को SD1 के आधुनिक इंजन का लाइसेंस नहीं मिल पाया था और इसीलिए कंपनी ने पहले Standard 20 में इस्तेमाल किये गए इंजन को ही Standard 2000 में लगाना सही समझा. इस इंजन में ट्विन-SU कारबोरेटर था. इसका माइलेज 7.69 से 12.5 किमी/लीटर के बीचे था और ये Standard 2000 को 145 किमी/घंटे की रफ़्तार तक पहुंचा देता था जो असल में Rover SD1 के 212 किमी/घंटे की टॉप स्पीड से काफी कम था.

Standard 2000 में Rover SD1 वाला 5-स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स भी नहीं था, इसके बदले इसमें एक 4-स्पीड गियरबॉक्स था. उस समय के रीव्यू के मुताबिक़, ये एक सही पसंद नहीं थी. इस कार में इलेक्ट्रिक विंडो और ऑप्शनल एसी जैसे फ़ीचर्स भी थे.

लेकिन Standard 2000 और कार निर्माता की असफलता के पीछे सरकार के नए माइलेज नियम थे. सरकार ने कंपनी पर कार के माइलेज की शिकायतों को लेकर जांच बिठा दी और इसके चलते इस कार निर्माता ने 2006 में अपना बोरिया-बिस्तर बाँध लिया. कंपनी जांच के दौरान भी कार्स बनाती रही और साथ ही UK तक स्पेयर पार्ट्स भी सप्लाई करती थी.

लेकिन, अपनी लाख दिक्कतों और उम्र के चलते भी इसका इंजन काफी भरोसेमंद मालूम पड़ता है. ये 13 साल बाद भी शुरू करने पर तुरंत चालू हो पड़ता है. अगर आप अपनी कार को ऐसे ही स्टोरेज में रखना चाहते हैं तो आपको कुछ बातें जान लेनी चाहिए. सबसे पहले, कार में नया इंजन ऑइल डालें. उसके बाद कार की बैटरी को डिसकनेक्ट कर दें. फिर कार में तेल डालें ताकि बंद हालत में कार के टैंक में ज़ंग ना लगे. उसके बाद आप कार को साफकर उसे स्टोरेज में रख सकते हैं.