Skoda Octavia vRS से Maruti Kizashi तक, 10 कार्स जिन्हें शौक़ीन पसंद और नापसंद भी करते हैं

इंडिया के सेकंड हैण्ड कार मार्केट का साइज़ नए कार के के मार्केट से दो गुना है. इसका मतलब ये है की यूजर्स के पास आज प्री-ओंड कार्स के वैरायटी के मामले में काफी चॉइस है. यही बात हमें शौकीनों के बढ़ते हुए तादाद पर लाती है जो किफायती और रोमांचकारी कार्स की तलाश में रहते हैं. साथ ही कुछ ऐसी पावरफुल यूज्ड कार्स होती हैं जिनके स्पेक्स तो बेहतरीन होते हैं लेकिन उन्हें रखना काफी महंगा पड़ता है. पेश है पॉवर आउटपुट के हिसाब से हमारी लिस्ट.

Fiat Palio 1.6 GTX

इंजन क्षमता: 1596 सीसी

अधिकतम पॉवर: 100 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 137 एनएम

Palio में 1.1-लीटर FIRE पेट्रोल से लेकर जाँची परखी 1.3-लीटर Multijet डीजल इंजन जैसे कई इंजन ऑप्शन आये थे यहाँ तक की इस हैचबैक में एक 100 बीएचपी और 1.6 लीटर 4 सिलिंडर पेट्रोल इंजन भी था जो इसे अपने समय की सबसे तेज़ कार बनाता था. इसके साथ तब के समय का इसका बेस्ट इन क्लास चेसी Palio 1.6 GTX को एक बहुत तेज़ गाड़ी बनाती थी. लेकिन इस गाड़ी के इंजन पार्ट्स को सोर्स करना मुश्किल है और कार में एयरबैग्स और ABS जैसे सेफ्टी फ़ीचर्स नहीं थे, ये फ़ीचर्स सिर्फ SP/PS वैरिएंट में थे और इन्हें बाज़ार में ढूंढना बहुत मुश्किल है.

परेशानी: पार्ट्स की दिक्कत

Ford Fiesta 1.6

इंजन क्षमता: 1596 सीसी

अधिकतम पॉवर: 101 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 146 एनएम

Fiesta 1.6 ने Ikon 1.6 को बखूबी से संभाला था. इसने हर तरफ इम्प्रूवमेंट की थी — इसका लुक बेहतरीन था, सस्पेंशन पहले से अच्छा था, और अर्गोनोमिक्स भी सही थे. Fiesta 1.6 ने मोटरस्पोर्ट्स में भी नाम कमाया था और इस केटेगरी में ये सबसे किफायती ट्रैक टूल था. लेकिन, आज से इतर तब के Ford के कार्स को भरोसेमंद होने के लिए नहीं जाना जाता था. कार के मेंटेनेंस का बिल आपको महंगा पड़ता है और आज के प्रीमियम hatchbacks के मुकाबले Fiesta में कम जगह थी.

परेशानी: महंगा मेंटेनेंस, भरोसेमंद नहीं

Mitsubishi Cedia 2.0

इंजन क्षमता: 1999 सीसी

अधिकतम पॉवर: 114 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 175 एनएम

Cedia मशहूर Lancer के बड़ा भाई था – Mitsubishi Lancer के ओनर्स के लिए एक बेहतरीन अपग्रेड. प्रीमियम इंटीरियर, आरामदायक राइड, और पावरफुल 2000 सीसी इंजन. लेकिन फ्यूल की बढती कीमत और मॉडर्न कम्पटीशन ने Cedia को चलने नहीं दिया. ये एक सेफ कार थी (इसमें उस समय ड्यूल एयरबैग और ABS थे) और चूँकि दक्षिण पूर्व एशिया में इसके पार्ट्स उपलब्ध थे, इसे मॉडिफाई करना भी आसान था. लेकिन समय बदल चूका है और इस समय इसे मेन्टेन करना महंगा साबित होगा. लेकिन ये काफी खूबसूरत दिखती है.

परेशानी: मेंटेनेंस में दिक्कत

Chevrolet Captiva

इंजन क्षमता: 1991 सीसी

अधिकतम पॉवर: 147 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 320 एनएम

इस लिस्ट में SUV? क्यों नहीं! Captiva 2.0 अभी भी परफॉरमेंस के मामले में अधिकांश 25-30 लाख रूपए वाले SUVs को कड़ी टक्कर दे सकती है. ये 200 किमी/घंटे से ज्यादा तेज़ जा सकती थी और कॉर्नर्स पर तीसरे गियर में भी ये चक्के घुमा सकती थी. इसका एक आटोमेटिक वर्शन भी उपलब्ध था लेकिन General Motors के इंडिया छोड़ के जाने के फैसले का मतलब है की अगर आप सस्ते में एक गाड़ी खरीद भी लेते हैं, इसे दुबारा बेचना काफी मुश्किल होगा.

परेशानी: अनाथ कार

Skoda Octavia RS

इंजन क्षमता: 1781 सीसी

अधिकतम पॉवर: 150 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 210 एनएम

असली Octavia अपने डीजल इंजन के चलते पॉपुलर हुई थी. बाद में कंपनी ने इसका RS वैरिएंट भी लॉन्च किया था — बॉडी किट्स के साथ फुली लोडेड, सनरूफ, और 1.8 लीटर का टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन जिसमें नीचे दिए गए BMW 3 Series को भी चैलेंज करने लायक ताकत थी. यूज्ड मार्केट में RS एक बेहतरीन खरीद है लेकिन ये आसानी से मिलती नहीं है. और तो और बहुत सारे यूनिट्स की हालत अच्छी नहीं होती और टर्बोचार्जर को रीप्लेस करना एक महंगा सौदा होता है.

परेशानी: बुरे कंडीशन वाली कार्स

BMW E90 320i

इंजन क्षमता: 1995 सीसी

अधिकतम पॉवर: 150 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 200 एनएम

छोटे आंकड़े देख धोखा न खाएं — 320i में एक नैचुरली ऐस्पीरेटेड इंजन था और फिर भी ये इस लिस्ट पर मौजूद है. आप कार के हैंडलिंग और किस प्रकार इसका इंजन 4000 आरपीएम के पार स्मूथ होता है आप इसे नज़रन्दाज़ नहीं कर सकते. इसके 2008 वाले मॉडल में थोड़ा फेसलिफ्ट और बेहतर सस्पेंशन था. लेकिन ये कार कम्फर्ट और अन्दर के स्पेस के बारे में नहीं है. इस लिस्ट में रेगुलर मेंटेनेंस भी ऊंचे पायदान पर रहेगी. लेकिन ये आखिरकार एक Beemer है और ब्रांड के पास आज भी काफी स्ट्रीट प्रजेंस है.

परेशानी: बिल

Hyundai Sonata 2.7 V6

इंजन क्षमता: 2359 सीसी

अधिकतम पॉवर: 165 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 236 एनएम

अगर आपको कम्फर्ट के साथ पॉवर चाहिए, आपके लिए Sonata अच्छी गाड़ी है. इस मॉडल को 2005 के आसपास बेचा जाता था और ये एक आश्चर्यजनक रूप से अच्छे H-matic आटोमेटिक ट्रांसमिशन के साथ भी आती थी. इसमें Hyundai का इंडिया में लाया गया अब तक का सबसे बड़ा इंजन था और इसकी कम कीमत इसे एक अच्छी डील बनाते हैं. लेकिन हम आपको चतावनी दे देते हैं की इसका माइलेज कुछ ख़ास नहीं है और इसका काफी सॉफ्ट सस्पेंशन आपको तेज़ रफ़्तार पर परेशानी में डाल सकता है.

परेशानी: माइलेज

Maruti Kizashi 2.4

इंजन क्षमता: 2393 सीसी

अधिकतम पॉवर: 175 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 230 एनएम

ये दरअसल में एक Suzuki है, हमें इसे Maruti बुलाने के लिए माफ़ करें! 175 बीएचपी के साथ Kizashi एक तेज़ कार थी और इसने शौकीनों का ध्यान खींचा था. Suzuki भरोसेमंद इंजन बनाती है और Kizashi का डिजाईन भी दमदार था. दिक्कत? इंडिया में बिके कम यूनिट्स के चलते इसके पार्ट्स आपको जापान से इम्पोर्ट करने होंगे जिसका मतलब है लम्बा इंतज़ार और इम्पोर्ट्स का लम्बा बिल भी.

परेशानी: क्योंकि आप इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का धंधा नहीं करते

Honda Aसीसीord 3.0 V6

इंजन क्षमता: 2997 सीसी

अधिकतम पॉवर: 221 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 196 एनएम

ये इस लिस्ट की सबसे भरोसेमंद कार है. कई लोगों को नहीं पता की 2000 के दशक के अंत में बेचीं जाने वाली Aसीसीord एक 6 सिलिंडर पेट्रोल इंजन के साथ भी आती थी जिसमें 220 बीएचपी का पॉवर भी था. एक आटोमेटिक के साथ भी, इस इंजन में इतना परफॉरमेंस था की ये पॉवर के दीवानों को खुश रखे. Aसीसीord V6 एक दो काम वाली गाड़ी हो सकती है आपको बाकी के दिनों कहीं जाने के लिए एक, और वीकएंड पर रेसिंग के लिए एक. दिक्कत? शहर में इस्तेमाल के दौरान 6-7 किलोमीटर/लीटर से ज्यादा की उम्मीद न रखें.

परेशानी: माइलेज

Skoda Superb 3.6 4×4

इंजन क्षमता: 3597

अधिकतम पॉवर: 260 बीएचपी

अधिकतम टॉर्क: 350 एनएम

इस लिस्ट में सबसे पावरफुल कार में 4-व्हील ड्राइव भी स्टैण्डर्ड है. इसका बड़ा 3.6-लीटर इंजन (कॉम्पैक्ट सेडान यूनिट्स से तीन गुना बड़ा!) को एक शानदार DSG गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया था, और 7 सेकेण्ड के अन्दर 0-100 किमी/घंटे पहुँचने की कथित क्षमता इसे एक परफॉरमेंस लिमो बनाती थी. और टैंक एक सामान इसकी बिल्ड क्वालिटी और जर्मन ब्रांड से बढ़ कर सेफ्टी — 8 एयरबैग, ABS, ESP, EDL, और भी काफी कुछ! लेकिन इसका ग्राउंड क्लीयरेंस काफी कम है और फौल्ट परस्त DSG को रीप्लेस करने कार की आधी कीमत के बराबर था वहीँ मेंटेनेंस भी महंगी थी.

परेशानी: लो ग्राउंड क्लीयरेंस

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