Royal Enfield Motorcycles Losing Charm Say Old Fans. The Times They Are a-Changin'?

Royal Enfield खो रही अपना ‘Charm’? ये कहते हैं पुराने फैन्स…

पिछले कुछ सालों से इंडिया के रोड्स पर नए Royal Enfields की तादाद बढ़ी है और कंपनी ने काफी प्रॉफिट कमाया है. ज़ाहिर सी बात है की रेट्रो-मॉडर्न बाइक की पॉपुलरिटी में ये वृद्धि कंपनी, कस्टमर, और फैन्स सभी के लिए अच्छा है. लेकिन, पुराने फैन्स का कहना है की Royal Enfield (RE) बाइक्स के अपनी पुरानी चमक खो दी है.

अब वो स्टेटस सिंबल नहीं रहीं

इंडिया में एक समय था जब Bullet 350/500 खरीदी जा सकने वाली सबसे महंगी बाइक हुआ करती थी. इस बात ने Royal Enfields को एक ऊंची स्टेटस दी थी और ये बाइक अमीर लोगों के पसंद की बाइक थी. पिछले एक दशक में कई नयी और महंगी बाइक्स इंडिया में लॉन्च हो गयी हैं और उन्होंने Royal Enfields के उनके ‘status bikes’ के पोजीशन से हटा दिया है.

कई लोगों को ये बात रास नहीं आ रही. लेकिन इस बात से कंपनी को कोई मलाल नहीं है क्योंकि अब REs पहले से ज्यादा डेमोक्रेटिक हैं और वो सिर्फ अमीर लोगों की जगह ज्यादा से ज्यादा लोगों को पसंद आ रही हैं. और बढती रिलायबिलिटी के साथ REs की बिक्री में भारी उछाल देखा जा रहा है.

ये काफी कॉमन हैं…

अब ये बात हमें पुराने फैन्स के दूसरे बड़े शिकायत पर लेकर आती है. अब Royal Enfields कहीं ज्यादा कॉमन हो गयी हैं और वो पहले के जैसी ‘stand-out’ मशीन नहीं रही. आप सड़क के हर कोने पर Bullets को देख सकते हैं. और अब आप दूसरों से अलग दिखने के लिए एक Bullet नहीं ख़रीद सकते क्योंकि उसे सभी लोग खरीद रहे हैं.

उदारीकरण (1990 से पहले) के पहले के ज़माने के मुकाबले अब इंडिया में लोग ज्यादा पैसे कह्र्च कर रहे हैं और अब अधिक लोग 1 लाख रूपए से महंगी बाइक ख़रीद सकते हैं या यूँ कहें की अब ज्यादा लोग Royal Enfields खरीद सकते हैं. REs की रिलायबिलिटी और क्वालिटी का स्तर काफी बढ़ा है और इसलिए ये अब ज्यादा कस्टमर्स को लुभा रही है. अगर आप सिर्फ नायाब दिखना है तो आपको Bullet के अलावे कुछ और लेना पड़ेगा.

इनमें ‘character’ नहीं रहा…

अब Royal Enfields में CB पॉइंट नहीं होता. वो Transistor Coil Ignition (TCI) सिस्टम पर चलती हैं जो बाकी हाई-एंड मोटरसाइकिल्स में भी पायी जाती हैं. इससे ज्यादा बेहतर ‘big bikes’ उपलब्ध हैं. वो अब pre-unit construction (इंजन-गियरबॉक्स-क्लच सब अलग-अलग यूनिट के तौर पर) इंजन पर नहीं चलतीं और उनमें unit construction engine लगा होता है.

अब तो गियर शिफ्टर और ब्रेक्स भी दायीं ओर होते हैं. अब कोई न्यूट्रल फाइंडर भी नहीं हैं क्योंकि RE के गियरबॉक्स अब काफी ‘slick’ हो चुके हैं. इन सभी बदलावों का मतलब है की एक मॉडर्न Royal Enfield को मैकेनिकली Bajaj Pulsar या Honda Unicorn जैसी गाड़ियों से अलग नहीं कहा जा सकता.

इन सभी बदलावों ने Royal Enfield के प्रोडक्शन को आसान बनाया है, इन्होंने ही उसे ज्यादा रिलाएबल और सभी के द्वारा पसंद किये जाने वाला बनाया है. लेकिन पुराने फैन्स के लिए वो ‘Brit-bike’ करैक्टर हमेशा के लिए गम हो गया है. अभी एक पुरानी Royal Enfield की रीसेल वैल्यू ज़्यादा है.

वो अब ‘hand-made’ नहीं हैं…

टैंक पर पिन-स्ट्राइपिंग और दूसरे छोटी चीज़ों के अलावे Royal Enfields अब ‘hand-made’ नहीं होतीं. उन्हें आधुनिक असेंबली लाइन पर बनाया जाता है जिसमें जटिल CNC मशीनिंग, मॉडर्न पेंट जॉब, वगैरह शामिल होता है. इन चीज़ों ने Royal Enfields को पहले से काफी बेहतर फिनिशिंग वाला एवं ज्यादा रिलाएबल बनाया है. इसलिए अब पुराने फंस अपने Royal Enfields के ‘hand-built’ होने के बारे में नहीं बघार पाते.

इसके पीछे एक कहानी है. Siddhartha Lal के Eicher ने दो दशक पहले घाटे में चल रही Royal Enfield को Madras Motors से खरीदा और मोटरसाइकिल कंपनी को उबारने का काम शुरू किया. अब इस इसमें नयी टेक्नोलॉजी, बेहतर क्वालिटी के मटेरियल पर फोकस, और ज़रूरी पार्ट्स को ‘hand-finishing’ न करना शामिल था. इस तरीके ने Royal Enfield को प्रॉफिट कमाने के काबिल बनाया. इसलिए कोई सवाल ही नहीं बनता की पुरानी हाथ से बनाने वाली तकनीक आज के आधुनिक युग में टिक पायेगी.

‘Highway Kings’, क्या सही में?

इंडिया में 150 सीसी और 200 सीसी बाइक्स के आने से पहले हाईवे क्रूजिंग और लम्बी दूरी के टूर ट्रिप के लिए Bullets बेताज बादशाह हुआ करते थे. लें अब चीज़ें बदल गयी हैं. एक आधुनिक 150 सीसी मोटरसाइकिल 350 सीसी Bullet को धूल चटा देगी, और 200 सीसी बाइक्स 500 सीसी Bullets को आसानी से पीछे छोड़ देगी.

इसका मतलब ये है की 350 सीसी Royal Enfields अब मुख्यतः कम्यूटर्स हैं और 500 सीसी बाइक्स उनके लिए हैं जो हाईवे पर 200 सीसी बाइक्स से कदम से कदम मिला कर चलना चाहते हैं. यहाँ तक की सबसे बड़ी Royal Enfield, Continental GT 535, भी 140 किमी/घंटे तक नहीं पहुँच पाती. अब Royal Enfields असल दुनिया में परफॉरमेंस से ज्यादा रेट्रो-लुक्स पर फोकस करती हैं.

सिर्फ एक ही जगह है जहां वो अभी भी सबसे आगे हैं और वो है भार उठाने की क्षमता एवं आरामदायक राइडिंग और येही बात इन्हें बढ़िया हाईवे क्रूजर बनाती है. Himalayan एक बेहतरीन क्रॉस-कंट्री मशीन है, लेकिन इसके बारे में कुछ भी रेट्रो या आकर्षक नहीं है. खैर अब समय बदल गया है और आकर्षण हो या नहीं Royal Enfields में सही परिवर्तन आया है.

Images courtesy 2, 5

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