Rolls Royce Silver Shadow: आप भी इस खूबसूरत विंटेज कार के मालिक बन सकते हैं!

Rolls Royce कार्स हमेशा से ही लक्ज़री और पॉवर का प्रतीक रही हैं. इस ब्रिटिश ब्रांड की कार्स राज्य-प्रमुखों और राजसी लोगों की पसंदीदा कार्स रही हैं जो इन्हें और भी ख़ास बनाता है. पेश है ऑटो इतिहास का एक नमूना जिसे आप खरीद सकते हैं. Rolls Royce Silver Shadow I जिसे Silver Wraith II भी कहा जाता है, को आप मुंबई से खरीद सकते हैं. इस बेहतरीन सेकंड हैण्ड कार की कीमत 75.75 लाख रूपए है. एक समय पर Muhammad Ali के पास भी ये कार हुआ करती थी.

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ये कार लगभग 40 साल पुरानी है और ऐसे कार के लिए ये कीमत काफी अच्छी-खासी है. लेकिन, इसके विंटेज वैल्यू और रेस्टोरेशन को देखते हुए इस पुराने Rolls Royce की कीमत समय से साथ बढ़ भी सकती है. इस कार की 40 साल की सर्विस हिस्ट्री भी मौजूद है और फैक्ट्री बिल्ड के काग़ज़ भी उपलब्ध हैं.

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Rolls Royce Silver Shadow I का निर्माण 1965 से 1980 तक किया जाता था और इसका हर मॉडल इंग्लैंड के Crewe की फैक्ट्री में बना हुआ है.

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इस कार को 3 बॉडी टाइप में बनाया जाता था — 2 डोर कूपे, 2 डोर कैबरिओले, और 4 डोर सलून. ये मॉडल 4 डोर सलून है जो इस कार का सबसे प्रैक्टिकल मॉडल भी है.

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इस विंटेज कार में एक 6.75 लीटर V8 नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन है जो अधिकतम 189 बीएचपी का पॉवर उत्पन्न करता है. इस इंजन के साथ General Motors से लिया गया 4 स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स स्टैण्डर्ड है. इसका इंजन आगे लगा है और ये रियर व्हील ड्राइव कार है. बिक्री के लिए मौजूद ये कार केवल 17,000 किलोमीटर चली है और ये सिंगल ओनर वर्शन है मतलब इसका खरीददार इसका दूसरा मालिक होगा.

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इस कार को खरीदने के लिए आप मुंबई में Vertical Motors के Charanjit से संपर्क कर सकते हैं. आप उनसे 9769778083 और [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं.

भारत में विंटेज कार कलेक्शन का चलन बढ़ता जा रहा है. लेकिन, इन कार्स के ओनरशिप को सुरक्षित रखने और इसे सुचारू ढंग से चलाने के लिए स्पष्ट नियमों की ज़रुरत है. अक्सर National Green Tribunal जैसी एजेंसियों द्वारा पुराने कार्स को बैन करने के ऑर्डर के चलते ऐसी विंटेज कार्स का भविष्य अधर में लटक जाता है. इससे विंटेज कार जमा करने वाले समुदाय के बीच काफी अनिश्चितता बनी रहती है.

विंटेज कार्स को मेन्टेन करने काफी महंगा होता है. इसे चलंत हालत में रखने के लिए सारे पार्ट्स इम्पोर्ट कराने पड़ते हैं और ये इम्पोर्ट टैक्स के चलते काफी महंगे हो जाते हैं. इसके मद्देनज़र सरकार को अच्छे तरह से मेन्टेन की हुई विंटेज कार्स के तरफ और भी नरम रुख अपनाना चाहिए और उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की अवधि बढ़ानी चाहिए. कुछ एजेंसियों द्वारा लगाए गए बैन के चलते इन विंटेज कार्स का रजिस्ट्रेशन रद्द कर देने से ऑटो जगत से जुड़े ज़रूरी इतिहास के खो जाने का डर बना रहेगा.

दुनिया की अधिकांश विकसित देशों में ऐसी कार्स का सालाना निरिक्षण किया जाता है और फिर उन्हें चलते रहने की इजाज़त दी जाती है. उए निरिक्षण सरकार एजेंसियां करती हैं और इस बात को सुनिश्चित करती हैं की ये विंटेज कार्स रोड पर सुरक्षित रूप से चल सकें. भारत में अभी तक देशभर के किसी RTO ने ऐसे नियम नहीं बनाये हैं.

वाया — Team-BHP