400 किलोग्राम की Suzuki Intruder खरीदना आसान है पर संभालना मुश्किल

मोटरसाइकिल्स के विकास के साथ ही साथ, हमने देखा है कि कई आधुनिक मोटरसाइकिलें हल्की हो गई हैं, जबकि अतिरिक्त उपकरणों की पेशकश के कारण बहुत-सी पहले से ज़्यादा भारी भी हो गई हैं. यदि आपने कभी भी भारी मोटरसाइकिल पर सवारी की है, तो आपको महसूस हो चुका होगा कि ये लम्बी-सीधी सड़क पर काफी स्थिर रहती हैं, पर हल्की स्पीड पर भी आसानी से गिर सकती हैं. यहां एक वीडियो है जो दिखाता है कि अगर राइडर पूरा ध्यान नहीं दे रहा हो, तो ये भारी बाइक्स कैसे असंतुलित होकर गिर सकती हैं. पेश हैं कुछ तकनीकें जो आपको भारी बाइक को सही तरीके से संभालने में मदद करेंगी.

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सही तकनीक से उठाना ज़रूरी है

मनुष्य भारी वस्तुओं को उठा सकता है लेकिन यदि तकनीक सही नहीं है, तो कोई गंभीर रूप से चोट भी लग सकती है. कुछ मामलों में, पीठ में कोई मांसपेशी खिंचने या हड्डी ख़िसक जाने से गंभीर चोट लग सकती है. यहां तक ​​कि आधुनिक हल्के वज़न वाली बाइक्स का वजन 120 किलोग्राम से अधिक होता है जो उठाए जाने के लिए काफी भारी वजन होता है. यदि आप इन बाइक्स की सवारी करते हैं, तो आपको इस तरह की भारी मशीनों को ठीक से उठाने का तरीका मालूम होना चाहिए.

यदि आप अकेले हैं, तो बाइक उठाने का ये सबसे आसान तरीका है. ये वीडियो दिखाता है कि किस प्रकार बाइक के निछले हिस्से को पकड़ कर और सीट पर अपनी छाती टिक्का कर बाइक को खड़े करने के लिए धक्का मारा जाना चाहिए. ये वीडियो बाइक को ठीक से उठाने की दो अलग-अलग तकनीकें दिखाती है. यदि आपके पास भारी बाइक है, तो ये तकनीक आपको ज़रूर सीखनी और अभ्यास करनी चाहिए.

सीट की हाइट कम करें

औसत भारतीय लोगों की लम्बाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजाइन की गई एडवेंचर बाइक्स और स्पोर्ट्स बाइक्स को संभालने में काफी मुश्किल बनाती है. ये बाइक की स्टॉक सीट की ऊंचाई की वजह से है. हालांकि, सीट ऊंचाई को कम करने के लिए कई ऑफिशल एक्सेसरीज और आफ्टरमार्केट उपाए हैं. यह बेहद महत्वपूर्ण है कि राइडर के पैर जमीन पर ठीक से पहुंचते हों.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीट की ऊंचाई ठीक तरह से एडजस्टेड है, राइडर बाइक पर बैठ और जमीन पर पैर रखकर जांच कर सकता है. बाइक पर बैठने के बाद राइडर की दोनों पैर एक साथ ज़मीन तक आराम से पहुँचने चाहिए. एक राइडर तब काफी अधिक आत्मविश्वास महसूस करता है जब उसकी दोनों पैर ज़मीन तक पहुँचते हैं, और इससे गिरने की संभावनाएं भी कम होती हैं.

किसी राइडिंग स्कूल में क्लासेज़ लें 

एडवेंचर बाइक्स में बहुत अधिक क्षमता और पॉवर होती है और सही तकनीकें हासिल कर लेने के बाद इन्हें चलाना बड़ा रोमांचक और मज़ेदार हो सकता है. हालांकि इंडिया में ज़्यादा राइडिंग स्कूल्स नहीं हैं पर Triumph Tiger Training Academy जैसी कई जगहें हैं जो राइडर्स को ऐसी तेज़ और पॉवरफुल मशीनों को सही तरीके से संभालना सिखाती हैं.

इस तरह के स्कूल विभिन्न सतहों पर बाइक को संभालने की तकनीक के साथ कैसे न्यूनतम दूरी पर रोकने के लिए ठीक से ब्रेक लगाने हैं, मोड़ों पर तेज़ रफ़्तार में मोड़ना और बिना थके हुए ठीक से कैसे चलाना सिखाते हैं. ऐसी तकनीकें जान बचाऊ भी साबित हो सकती हैं. बुरा वक्त कह कर नहीं आता इसलिए हमेशा तैयार रहना ही बेहतर होता है.

तेज़ और तीखे मोड़ों पर सही तरीके से मोड़ना सीखें 

भारी और पॉवरफुल बाइक्स को लम्बी सीधी सडकों पर चलाना जितना मज़ेदार और आसान है, तेज़ तीखे मोड़ों पर उन्हें मोड़ना उतना ही मुश्किल और खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे मोड़ों पर मोड़ते वक्त अगर बाइक की स्पीड काफी कम है और राइडर मोड़ने के लिए झुका हुआ है तो बाइक सीधी नहीं रह पाती. ये जानना बहुत ज़रूरी है कि ऐसे मोड़ो पर मुड़ते समय बाइक सही स्पीड पर हो. तेज़ स्पीड पर मुड़ते समय अक्सर आपकी बाइक अपनी लेन से निकल कर या संतुलन खो कर आपको गिरा देती है जिससे दुर्घटना हो जाती है. हमेशा हल्की स्पीड में बाइक मोड़ते समय जिस ओर मोड़ रहे हों उस ओर पैर को बहार की ओर निकाल कर रखें. ऐसा करने से बाइक के गिरने पर आपको कुछ तो सहारा मिलेगा जिससे आप शायद अपनी बाइक को गिरने से भी बचा सकें.

ब्रेक्स का उपयोग अक्लमंदी से करें

भारी बाइक्स को सावधानी से संभालने की ज़रूरत होती है. हल्की रफ़्तार के वक्त हमेशा ध्यान रखें की आप अगले ब्रेक्स के मुकाबले पिछले ब्रेक्स ज़्यादा ज़ोर से लगाएँ. ऐसा ना किया तो अगले ब्रेक ज़ोर से लगा देने पर राइडर बाइक के ऊपर संतुलन खोकर आसानी से गिर सकता है. इसीलिए पिछला ब्रेक इस्तेमाल करने पर आपको सुचारु रूप से रुकने का पर्याप्त समय मिल जाएगा और आप अपना पैर ज़मीन पर भी आसानी से टिका पाएँगे.

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