Non-ISI Helmets की बिक्री होगी देशभर में बंद, जानें डिटेल्स…

बिना ISI मार्क वाले टू-व्हीलर हेलमेट के इस्तेमाल को बंद करने की ओर एक और कदम उठाते हुए भारत सरकार जल्द ही देशभर में इनकी बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा देगी. 2018 के अंत तक बिना ISI मार्क वाले हेलमेट बेचना एक दंडनीय अपराध होगा. हमारा मानना है की टू-व्हीलर्स से संबंधित हादसों को कम करने की दिशा में ये एक बड़ा कदम है.

ये कहा जा रहा है की ISI हेलमेट एसोसिएशन ने बिना ISI मार्क वाले हेल्मेट्स की बिक्री पर प्रतिबन्ध के फैसले का स्वागत किया है. ये फैसला MoRTH (परिवहन मंत्रालय) द्वारा 7 मार्च को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लिया गया जहां Nitin Gadkari और Dharmendra Pradhan ने Sukhad Yatra मोबाइल एप्प और 1033 National Highway इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर लॉन्च किया. BIS ने सर्वोच्च न्यायालय की रोड सेफ्टी पैनल को बताया की ISI प्रमाण को अनिवार्य बनाने का कदम अभी से 6 महीनों में अमल किया जा सकता है.

ISI Helmet Manufacture Association के प्रेसिडेंट Rajeev Kapur ने कहा की “हमें नीति निर्माताओं पर गर्व है क्योंकि ये कदम बेहद ज़रूरी था. अभी के आंकड़ों को देखें तो इंडिया में टू-व्हीलर राइडर्स द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले 75 से 80 प्रतिशत हेलमेट ISI के मानकों पर खरे नहीं उतरते. इस बात के बावजूद की रोड पर हुई मौतों में एक चौथाई हिस्सा टू-व्हीलर राइडर्स का है, मार्केट अभी भी दोयम दर्जे के प्रोडक्ट्स से भरा पड़ा है. हम खुश हैं की सरकार ने रोड पर मौतों को कम करने के लिए सभी हेलमेट निर्माताओं के लिए अपने हेडगियर के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) से इंडियन स्टैंडर्ड्स का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया है.”

जहां बाइक राइड के दौरान अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए हेलमेट पहनना कॉमन सेंस की बात है, इंडिया के कई टू-व्हीलर इस्तेमालकर्ता हेलमेट लगाना ज़रूरी नहीं समझते. जहां टू-व्हीलर राइडर्स को हेलमेट पहनने के लिए मजबूर करने वाले कई अभियानों के कुछ सकारात्मक नतीजे सामने आये हैं, कई यूजर सस्ते एवं बिना-ISI मार्क वाले हेलमेट खरीदते हैं. ऐसे हेलमेट आमतौर पर कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते और इन्होंने एक नकली हेलमेट इंडस्ट्री को जन्म भी दे दिया है. अर्थशास्त्रियों का कहना है की ISI के मान्यता वाली हेलमेट को बनाने में कम से कम 300-400 रूपए खर्च होंगे ही. लेकिन इन हेलमेट के कई रेप्लिका हैं जो 100 रूपए तक की कम कीमत पर उपलब्ध हैं. ऐसे हेलमेट ट्रैफिक पुलिस के फाइन से बचने के लिए खरीदे जाते हैं. लेकिन एक्सीडेंट के हालात में ये रत्ती भर सुरक्षा भी नहीं प्रदान करते.

इंडिया में टू-व्हीलर हेल्मेट्स की अनुमानित डिमांड लगभग 9 करोड़ प्रति वर्ष की है. टू-व्हीलर इस्तेमालकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग बिना ISI प्रमाण वाले हेलमेट खरीदता है. सरकार का ये कदम उन्हें ISI प्रमाणित हेलमेट खरीदने को मजबूर करने की दिशा में है. प्रशासन जल्द ही बिना ISI प्रमाण वाले हेलमेट बेच रहे खुदरा विक्रेताओं को चिन्हित कर दण्डित करने की कार्यवाही में जुटेगा.

×

Subscibe our Newsletter