भारत में ‘नॉन-ISI’ हेल्मेट्स बनाने और बेचने वालों को होगी जेल

भारतीय सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राइडर्स की सुरक्षा के संबंध में नवीनतम निर्देश अगले दो महीनों में नॉन-ISIब्रांडेड हेलमेट के निर्माताओं और विक्रेताओं को मुश्किल में दाल देगा. नए निर्देश के मुताबिक, नॉन-ISIब्रांडेड हेलमेट बेचने या निर्माण करने वाले किसी भी व्यक्ति को वारंट की आवश्यकता के बिना गिरफ्तार किया जाएगा. पहली बार इस नए नियम को तोड़ने वाले अपराधियों को 2 साल तक जेल और / या 2 लाख रूपए के जुर्माना का सामना करना पड़ेगा. इसे अधिक अपराध पर और ज़्यादा जुर्माना लगेगा .

हालांकि ये पहली बार नहीं है कि राइडर्स द्वारा पहने जाने वाले नॉन-ISIमार्क हेल्मेट पर कानून सख़्ती आज़मा रहा है, बैंगलोर की पुलिस बल पिछले साल ISI ब्रांडेड हेल्मेट पहनने के लिए राइडर्स को मजबूर करने की कोशिश कर रही थी. हालांकि, नए निर्देश में हेल्मेट सुरक्षा के संबंध में ISI स्टैंडर्ड्स के हालिया अपडेट के बाद, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय वास्तव में हेलमेट के संबंध में कानून को सख्ती से लागू कर रहा है.

भारत में बेचे जाने वाले किसी भी नए हेल्मेट को टू-व्हीलर राइडर्स के लिए IS 4151: 2015 standards for Protective Helmets मानकों का अनुपालन करने के लिए कानून द्वारा बाध्य किया जाएगा और ISI मार्क सहन करना होगा. भारतीय सवारों द्वारा उपयोग के लिए ISI चिह्न के बिना निर्मित या बेचा गया कोई हेल्मेट निर्माता / विक्रेता को अदालत के चक्कर काटने पड़ेंगे.

हेल्मेट्स के संबंध में कानूनों में नए बदलाव ये सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि राइडर्स उन हेलमेट का उपयोग करें जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. Two-Wheeler Helmet Manufacturers Association द्वारा सरकार के निर्देश का स्वागत किया गया है, जिसके अध्यक्ष Rajeev Kapur (जो Steelbird के MD भी हैं) ने सरकार द्वारा इस कदम का स्वागत किया कि यह निर्णय नॉन-ISI-मार्केड हेल्मेट की बिक्री, निर्माण, स्टोरेज को दूर करने में मदद करेगा.

हेलमेट की सुरक्षा के लिए ISI स्टैंडर्ड्स में नवीनतम परिवर्तन, जो 15 जनवरी 2019 को लागू होंगे, के अनुसार हेलमेट के लिए अधिकतम स्वीकार्य वजन 300 ग्राम से घटाकर, 1.5 किलोग्राम से 1.2 किलोग्राम हो जाएगा. वजन घटाने से निपटने के लिए, Bureau of Indian Standards ने और अधिक परीक्षण शुरू किए हैं ताकि कि हेल्मेट की सुरक्षा में वज़न की कटौती के कारण कोई समझौता नहीं किया जाए.