दिल्ली को जाम और प्रदूषण से छुटकारा दिलाने के लिए नितिन गडकरी ने की हाईवे प्रोजेक्ट की शरुआत

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने कुछ दिनों पहले अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक छह लेन हाईवे की आधारशिला रखी. इस हाईवे का निर्माण दिल्ली की सड़कों पर यातायात को कम करने और राजधानी शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से किया गया है.

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Gadkari ने कहा कि दिल्ली के आसपास सड़क परियोजनाओं के लिए 50,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. 31.3 किलोमीटर हाई-स्पीड सिग्नल फ्री यह हाईवे राष्ट्रीय हाईवे-709B का एक हिस्सा है और यह दिल्ली के अक्षरधाम से सहारनपुर बाईपास तक जाएगा. यह सड़क गीता कॉलोनी, शास्त्री पार्क, खजूरी खास, दिल्ली-यूपी बॉर्डर और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर स्थित मंडोला इंटरसेक्शन से गुजरेगी. इस परियोजना में शाहदरा और आनंद विहार रेलवे लाइन और दिलशाद गार्डन आईएसबीटी मेट्रो लाइन के ओवर-ब्रिज भी शामिल हैं.

नए कॉरिडोर को दो खण्डों में विकसित किया जाएगा – पहला पूर्वी दिल्ली के अक्षरधाम से दिल्ली/यूपी सीमा तक 14.75 किलोमीटर लम्बा खंड और दूसरा दिल्ली/यूपी सीमा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे इंटरसेक्शन तक 16.57 किमी लंबा खंड. साथ ही कॉरिडोर में 19 किमी का एलिवेटेड सेक्शन होगा.

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इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 2,830 करोड़ रुपये है. परियोजना में 6 लेन का निर्माण, हाईवे के दोनों ओर सर्विस रोड, 8 नए अंडरपास, प्रमुख सड़कों को जोड़ने वाले 7 रैंप, 15 प्रमुख जंक्शन, 34 छोटे जंक्शन और कई स्थानों पर ओवरब्रिज शामिल हैं.

Nitin Gadkari ने इस कार्यक्रम में यह भी घोषणा की कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर काम मार्च तक पूरा हो जाएगा और अप्रैल के बाद लोग वर्तमान 3.5 घंटे के बजाय 40 मिनट में दिल्ली से मेरठ पहुंच सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 10,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए नींव का पत्थर अगले सप्ताह रखा जाएगा और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा गया है.

दिल्ली में रहने वाले लोग पिछले कई वर्षों से यातायात और वायु प्रदूषण जैसी बड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने से इन मुद्दों को कुछ हद तक हल करने में मदद मिलेगी. जब से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ है तब से राजधानी में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों की संख्या में 27 प्रतिशत की भारी कमी आई है.