मॉडिफाइड Royal Enfield अब काँटों का ताज हो गया है, देखिये इस बाइकर के साथ क्या हुआ…

Royal Enfield शायद ऐसी मोटरसाइकिल्स हैं जिन्हें इंडिया में सबसे ज्यादा मॉडिफाई किया जाता है. आपको इंडिया के हर कोने में मॉडिफाइड Royal Enfield मोटरसाइकिल्स मिल जाएँगी. लेकिन आजकल ऐसी मॉडिफाइड बाइक्स चलाने वाले लोगों को काफी दिक्कतें आने लगी हैं. पर क्यों? आइये पता करते हैं.

पुलिस और मॉडिफिकेशन

पेश है एक विडियो जिसमें BigBang Biker अपने नए Royal Enfield मॉडिफाइड मोटरसाइकिल पर Bangalore के सड़कों पर एक व्लॉग बना रहे हैं. उन्हें कई बार अपनी मॉडिफाइड मोटरसाइकिल Bazuka चलाने के लिए पुलिस द्वारा रोका गया. उन्हें हर बार पुलिस यही कहती की इंडिया में मॉडिफाइड मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति नहीं है. व्लॉगर का कहना था की वो सिर्फ अपने YouTube चैनल के लिए विडियो बना रहे हैं और ये उनकी बाइक नहीं है. पुलिस ने चालान तो नहीं काटा लेकिन उन्हें मैं रोड पर बाइक की विडियो बनाने से मना किया.

इंडिया में Motor Vehicle Act मॉडिफिकेशन्स पर रोक लगाती है. क़ानून के मुताबिक़, अपनी गाड़ी के रंग या ढाँचे में मॉडिफिकेशन गैरकानूनी है. गाड़ी के ढाँचे में बदलाव उसे कमज़ोर बनाती है औए इससे एक्सीडेंट के दौरान राइडर्स को गंभीर चोटें आ सकती है. मॉडिफिकेशन्स को लीगल बनाने के लिए ओनर्स को ARAI (Automotive Research Authority of India) से मॉडिफाइड पार्ट्स की अनुमति लेनी होती है और उसे अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर दर्शाना होता है.

ये पहली बार नहीं है

राज्यों की पुलिस, खासकर Kerala और Karnataka पुलिस ने मॉडिफाइड मोटरसाइकिल्स के खिलाफ सख्ती बरतनी चालू कर दी है. पुलिस ने आफ्टरमार्केट और शोर करने वाले एग्जॉस्ट लगी बाइक्स को रोक कर उनपर चालान करना शुरू कर दिया है. कई मामलों में पुलिस ने इन मॉडिफाइड एग्जॉस्ट को हटा कर उन्हें उनके ओनर्स के सामने कुचल दिया है. ऐसी कार्यवाही Kerala और Karnataka में काफी आम हो चुकी है लेकिन अभी तक बाकी राज्यों में लोगों को ऐसा कुछ झेलना नहीं पड़ा है.

क्या आप एक मोटरसाइकिल को कानूनन रूप से मॉडिफाई कर सकते हैं?

हाँ, लेकिन ये एक लम्बी प्रक्रिया होती है. आप मॉडिफिकेशन को ARAI से प्रमाणित करा उसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखवा सकते हैं लेकिन ये काफी टेढ़ी और लम्बी प्रक्रिया है. एक दूसरा उपाय है ऐसे फ़ीचर्स जोड़ना को मोटरसाइकिल के ढाँचे में दखल न दें. उदाहरण के लिए, आप औक्सिलरी लैंप और रिमोट लॉकिंग सिस्टम लगा सकते हैं लेकिन आप परफॉरमेंस स्प्रोकेट नहीं लगा सकते या मोटरसाइकिल का हैंडलबार नहीं बदल सकते.

साथ ही आप बाइक के रंग को विनाइल जोड़ कर बदल सकते हैं लेकिन उसे दूसरे रंग में रंगना गैरकानूनी है और उसे स्थानीय RTO द्वारा RC पर लिखवाना होता है. इतने कड़े नियम मॉडिफिकेशन हाउसेज़ की रचनात्मकता पर बेड़ियाँ लगाते हैं और इंडिया में इन मॉडिफाईयर्स की मदद के लिए भी एक नियम होना चाहिए. कई देशों में कस्टमाईजेशन एक बड़ा बिज़नस है.

अगर इंडिया मॉडिफिकेशन को नियमित कर इसके अनुमति की प्रक्रिया आसान कर देता है ये इस देश के ऑटोमोटिव कल्चर के लिए बेहद लाभकारी होगा.

सोर्स — BigBang Biker