बिधायक की पेट्रोल SUV में डाला डीजल, क्या करें अगर आपके साथ ऐसा हो जाए?

रोड पर बढ़ते हुए कार्स की संख्या को देखते हुए, कार में गलत फ्यूल डाल देने की समस्या कोई नयी बात नहीं है. पिछले साल, Karnataka के एक MLA गलत फ्यूल डाले जाने के शिकार तब बन गए जब फ्यूल अटेंडेंट ने उनकी पेट्रोल पॉवर वाली Volvo XC90 Hybrid में डीजल डाल दिया. ऐसी गलतियां हो जाती हैं और कार ओनर्स को फ्यूल भरवाते वक़्त ज्यादा सतर्क रहना चाहिए. लेकिन अगर ऐसी गलती हो जाए तो आपको क्या करना चाहिए?

इसे पहचानें

मॉडर्न इंजन में गलत फ्यूल जाने से वो ज़्यादा दिक्कत कर सकते हैं. अगर आपने पहचान लिया है की कार में गलत फ्यूल डाल दिया गया है, तो सबसे पहले गाड़ी को स्टार्ट मत कीजिये. गाड़ी को वहीँ रहने दीजिये या उसे धक्का देकर साइड में कीजिये और फिर किसी से मदद मांगिये. सर्विस सेण्टर पूरे फ्यूल को टैंक और इंजन से निकाल इंजन को डैमेज होने से बचा लेते हैं. लेकिन अगर आपने बिल नहीं देखा और आपको पता नहीं है की कार में गलत फ्यूल है और गाड़ी चलाने लगे तो क्या?

पेट्रोल कार में डीजल होने के चिन्ह: डीजल पेट्रोल के मुकाबले ज़्यादा गाढ़ा होता है. इसके चलते ये पेट्रोल कार के फ्यूल फ़िल्टर में चिपक जाता है और फ्यूल लाइन को जाम कर देता है. ऐसे मामलों में, आप देखेंगे की टैंक में पर्याप्त फ्यूल होने के बावजूद इंजन बंद हो जाएगा. लेकिन अगर डीजल इंजन में पहुँच जाता है और स्पार्क प्लग उसे जलाने की कोशिश करता है तो एग्जॉस्ट से गहरा सफ़ेद धुआँ निकलेगा. डीजल आसानी से नहीं जलता उसे जलाने से पहले प्रेशराइज़ करना पड़ता है. और थोड़े धक्के खाने के बाद इंजन बंद हो जाता है.

डीजल कार में पेट्रोल होने के चिन्ह: डीजल इंजन पेट्रोल जितने सरल नहीं होते. वो दबाव वाले फ्यूल को सिलिंडर के अन्दर जलाने के लिए भेजने के लिए पेचीदा मैकेनिकल्स का इस्तेमाल करते हैं. पेट्रोल आसानी से जल जाता है और डीजल इंजन के पेचीदा होने के चलते आप इस बात को जल्दी नोटिस नहीं कर पायेंगे. और इंजन कुछ किलोमीटर के बाद ही गहरा काल धुआँ छोड़ने लगता है. डीजल इंजन में स्पार्क प्लग नहीं होता और पेट्रोल बिना आग के जलती नहीं. और अगर आप कार को फिर भी चलाने की कोशिश करते रहेंगे तो इंजन कुछ समय के बाद बंद हो जाएगा.

क्या आप इसे सही कर सकते हैं?

अगर आप अपनी गलती को पहचान कर समय रहते इंजन बंद कर दें तो इंजन को पूरी तरह से बचाया जा सकता है. ऐसे मामलों में मैकेनिक फ्यूल टैंक को खाली कर देते हैं और मैं फ्यूल लाइन को अच्छे से साफ़ करते हैं. और अगर फ्यूल इंजन तक पहुँच गया है तो वो इंजन खोलकर उसे पूरी तरह से साफ़ भी करते हैं. सफाई के दौरान इंजन चलाना भी पड़ता है ताकि पिस्टन के अन्दर पहुंचा फ्यूल बाहर निकल आये.
पेट्रोल एन्गिएन में फ्यूल फ़िल्टर और स्पार्क प्लग जैसे पार्ट्स को बदलना पड़ता है. डीजल इंजन में इंजन के नीचे लगा इंजन ड्रेन प्लग इस बात को सुनिश्चित करता है की फ्यूल पूरी तरह से बाहर निकल जाए. इसे साफ़ करने के बाद आपको सही फ्यूल से टैंक भरना होगा और एडीटिव डालना सही होगा ताकि इंजन बचे हुए गलत फ्यूल से भी मुक्त हो जाए.