Kerala Police Seizes Mercedes-Benz, BMW Cars, and Here's the Reason केरल पुलिस ने इन कारणों से Mercedes-Benz, BMW वगैराह की कार्स को किया ज़ब्त

केरल पुलिस ने इन कारणों से Mercedes-Benz, BMW वगैराह की कार्स को किया ज़ब्त

कोच्ची के Kerala Motor Vehicle Department (MVD) ने 5 लक्ज़री कार्स ज़ब्त की हैं जिन्हें डीलरशिप्स टेस्ट गाड़ियों के रूप में इस्तेमाल करते हैं. MVD ने इन गाड़ियों को इसलिए ज़ब्त किया क्योंकि वो अभी भी Trade Certificate (TC) पर टेस्ट कार्स के रूप में चल रहे थे और ये गैरकानूनी है.

लाल नम्बरप्लेट पर चल रही गाड़ियाँ

Mercedes Seized Kerala

हमने भारत में अक्सर गाड़ियों पर लाल नम्बर प्लेट देखे हैं. MVD ने इन गाड़ियों में Central Motor Vehicles Rules 1989 के धरा 61 के तहत ‘प्रदर्शन का उचित ट्रायल’ के लिए ज़ब्त किया था. TC प्लेट्स तात्कालिक अनुज्ञा के लिए होते हैं और डीलर्स इन्हें केवल छोटे ट्रायल के लिए ही इस्तेमाल कर सकते हैं. नियम कहता है की TC वाली गाड़ी का ट्रायल और धर्मकांटे से लाने-ले जाने के अलावे किसी भी सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

कोच्ची पुलिस ने एक Mercedes-Benz GLS को चिन्हित किया क्योंकि ड्राईवर गाड़ी चलाते वक़्त अपने मोबाइल पर बात कर रहा था. जब पुलिस ने देखा तो पाया की कार 10,000 किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी थी और उसपर अभी भी TC प्लेट लगे हुए थे. ये गाड़ी डीलरशिप द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक टेस्ट ड्राइव गाड़ी थी जिसे डीलरशिप भावी कस्टमर्स को टेस्ट ड्राइव देने के लिए इस्तेमाल करते हैं. Mercedes-Benz को रोकने के बाद, Kerala MVD ने कुछ हाई-एंड कार्स की डीलरशिप्स को चेक किया और पाया की ये प्रथा बेहद आम है.

कार डीलरशिप और शोरूम अक्सर इन प्लेट्स को टेस्ट ड्राइव वाली गाड़ियों पर इस्तेमाल करते हैं और बाद में इन्हें बेच देते हैं. एक गाड़ी को रजिस्टर कराने में एक्स-शोरूम कीमत की लगभग 20% कीमत का खर्च आता है जो ऐसे लक्ज़री कार्स के लिए काफी ज्यादा हो जाता है. कई डीलरशिप्स इन गाड़ियों को TC प्लेट्स के साथ इस्तेमाल करते हैं और फिर इन गाड़ियों को थोड़े कम कीमत पर बेच देते हैं. ऐसी गाड़ियाँ सेकंड हैण्ड रूप में भी नहीं बेचीं जातीं क्योंकि इन्हें कभी भी रजिस्टर नहीं कराया गया है.

MVD ने एक BMW और Mercedes-Benz एवं Volkswagen की दो गाड़ियाँ ज़ब्त की हैं. इन गाड़ियों को छुड़ाने के लिए ओनर्स को 2,000 रूपए का जुर्माना और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन टैक्स चुकाना होगा.

गाड़ी ज़ब्त करने वाले एक इंस्पेक्टर ने कहा,

बेचीं गयी गाड़ियों को डिपार्टमेंट में रजिस्टर कराना चाहिए और उनका रोड टैक्स भरा जाना चाहिए. लेकिन, कई डीलर्स दोनों ही नियम को तोड़ते हैं. जहां TC वाली एक गाड़ी को छोटे ट्रायल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, हमें पता चला है की डीलर्स उन्हें दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल करने के अलावे लम्बे समय के लिए इस्तेमाल करते हैं. वो TC का दुरूपयोग करते हैं और सेल्स टैक्स बचाने के लिए इन गाड़ियों को रजिस्टर नहीं कराते.

हमें भविष्य में ऐसे और भी छापे देखने को मिल सकते हैं. पुलिस ने राज्यभर के अलग-अलग डीलरशिप्स पर छापा मारना शुरू कर दिया है. हालांकि निर्माताओं के डीलरशिप नेटवर्क ने इस कदम के खिलाफ आवाज़ उठाई है और कहा है की CMVR नियम उन्हें ऐसे डेमो कार्स को जब तक मन तब तक TC पर चलाने की अनुमति देता है.

सोर्स

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