केवल 10 साल के लिए गाड़ियों को रजिस्टर करने में जुटी केरल सरकार!

भारत में प्रदूषण की समस्या के लगातार विकराल रूप धारण करते जाने के चलते अब राज्य सरकारें गाड़ियों से हो रहे प्रदूषण को कम करने की दिशा में कई कदम उठा रही हैं. केरल सरकार परिवहन विभाग के मुख्य सचिव, K.R. Jyothilal ने इसी दिशा में एक पहल करते हुए कहा है कि केरल सरकार राज्य में किए जाने वाले वाहनों के पंजीकरण की समय-सीमा को दस साल तक सीमित करने की तैयारी में है. इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग के प्रोत्साहन के लिए सरकार इन इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आजीवन पंजीकरण की सुविधा देने की तैयारी में है.

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Mr Jyothilal ने आगे कहा है कि e-mobility को प्रोत्साहित करने के लिए जल्द ही सभी पेट्रोल पंप पर चार्जिंग पॉइंट मुहैय्या कराना अनिवार्य कर दिया जाएगा. साथ ही सभी परंपरागत इंधनों पर चलने वाले वाहनों को अगले पांच साल में इलेक्ट्रिक, CNG या LNG इंधन का उपयोग करना होगा.

यह भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम होगा. दिल्ली-NCR में सभी डीज़ल वाहनों को पंजीकरण के बाद केवल 10 सालों तक और पेट्रोल वाहनों को पंजीकरण के बाद केवल 15 सालों तक ही इस्तेमाल किए जाने की इजाज़त है. हालांकि NCR में अभी तक इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में कोई भी पहल नज़र नहीं आ रही.

परिवहन सचिव ने तेल-कंपनियों और वाहन निर्माताओं से भी कहा है कि वो भी जीवाश्म- इंधन तकनीकों पर पैसा लगाने की बजाय इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन पर पूँजी लगाएं. उन्होंने सभी से यह दरख्वास्त भी की है कि वो भविष्य में हाइड्रोजन को इंधन के रूप में इस्तेमाल कर पाने की संभावनाएं को तलाशें.

Kerala

लेकिन हमें अभी ये नहीं पता

इस नए नियम को कब से लागू किया जाएगा? इस बात की अभी तक कोई भी जानकारी नहीं है कि केरल में इस नए नियम को किस तारीख से लागू किया जाना है. यह प्रस्तावित नियम लागू होने से पहले काफी ज़्यादा बदल सकता है.

पुराने और पहले से पंजीकृत वाहनों का क्या होगा? यह बात भी अभी साफ़ नहीं है. अभी इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते कि पहले से पंजीकृत पेट्रोल और डीज़ल वाहनों को यह नए नियम किस तरह से प्रभावित करेंगे.

क्या यह नियम फाइनल कर दिया गया है? नहीं. उम्मीद है कि यहां केवल एक मंशा को ज़ाहिर किया गया है जिस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. हमारे अनुसार अभी इस नियम पर प्रतिक्रिया और इसके विरोध में दबाव बनाने के लिए जनता के पास पर्याप्त वक़्त है.

केन्द्रीय सरकार पहले ही कह चुकी है कि भारत में परम्परागत-इंधनों पर चलने वाले वाहनों की बिक्री पर 2030 के बाद प्रतिबंध लग जाएगा. हालांकि वाहन-निर्माताओं के विरोध के बाद इस इस नियम पर रोक लग गयी थी. फिलहाल केन्द्रीय सरकार भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए नई नीतियाँ बनाने के काम में जुटी है और इनकी कीमतें कम करने के लिए सब्सिडी आदि लागू करने की तैयारी में भी जुटी है.

भारतीय बाज़ार में फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों के विकल्प बेहद सीमित हैं. केवल Mahindra ही इकलौती कार निर्माता कंपनी है जो बाज़ार में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध करा रही है. जल्द ही Tata भी इस श्रेणी में अपने उत्पादों को बाज़ार में लॉन्च करेगी. यहां तक कि Hyundai और Nissan जैसी अंतरराष्ट्रीय कार निर्माता कंपनियां भारतीय बाज़ार इस साल के अंत में अपने इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने की तैयारी में हैं जिसके चलते ग्राहकों को चुनाव के लिए काफी सारे विकल्प मिल जाएंगे.

भारत में गाड़ियों की चार्जिंग के मद्देनज़र मूलभूत सुविधाओं की बहुत बड़ी कमी है. इलेक्ट्रिक वाहनों के लोकप्रिय न होने के पीछे की एक बहुत बड़ी वजह हाईवे और शहरों में चार्जिंग स्टेशनों की कमी है. हालांकि दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना सामने आई थी और शायद जल्द ही हम इस किस्म की योजना देश के विभिन्न इलाकों में सामने आते देख पाएं.