Indian Air Force Saves Royal Enfield Himalayan Riders Stuck in Snow Storm बर्फ में फ़से Royal Enfield Himalayan चालकों को 'भारतीय वायु सेना' ने कैसे निकला बाहर

बर्फ में फ़से Royal Enfield Himalayan चालकों को ‘भारतीय वायु सेना’ ने कैसे निकला बाहर

हर उस भारतीय जिसे बाइक राइडिंग से प्यार है की यह पहली ख़्वाहिश होती है कि वो अपनी बाइक चला कर हिमालय की लद्दाख़ और स्पिति जैसी खूबसूरत वादियों के अद्वितीय नज़ारे अपनी आखों से देख सके. लेकिन इन ख़्वाहिशों को पूरा करने के लिए आपको हर एक बड़ी-छोटी आपदा से दो-चार होने की पूरी तैयारी रखनी होती है. क्योंकि इन वादियों का मौसम किसी भी क्षण अपना रौद्र रूप दिखा आपको ‘कुँएं और खाई’ के बीच वाली स्थिति में ला कर छोड़ सकता है. कुछ ऐसा ही हुआ Royal Enfield Himalayan के मालिक Anurag Dixit के साथ जब वे हाल ही में स्पिति में अपनी बाइक लेकर निकले.

Re Himalayan Snow Spiti

Anurag Dixit और उनके साथी Himalayan राइडर्स एक साथ हिमाचल के लाहौल और स्पिति इलाके में बाइकिंग कर रहे थे जब इन सुहानी वादियों का कहर इन पर बरपा और लगातार 3 दिनों की बर्फ़बारी ने इन सब को घेर लिया. ऊपर वाले की मेहरबानी से Anurag Dixit और उनके साथियों को इस रास्ते पर कहीं शरण लेने की जगह मिल गयी और इन सब ने इन 3 दिनों में गिरी 6 से 7 फुट बर्फ को झेल लिया.

जब सूर्य देवता ने दर्शन दिए तो Dixit और उनके साथी राइडर्स में उस जगह से बाहर निकलने का हौसला पैदा हुआ लेकिन अपनी सारी कोशिशों में असफल होने के बाद उन्हें अंततः ‘भारतीय वायु सेना’ ने ही बाहर निकाला. ये बात अलग है की उन्हें अपनी Royal Enfield Himalayan मोटरसाइकल्स को वहीं छोड़ना पड़ा और अब इन सब लोगों को अपनी बाइक्स को वापस पाने के लिए बर्फ के पिघलने का इंतज़ार करना होगा.

Dixit ने अपनी एक Facebook पोस्ट में बताया कि कैसे ‘भारतीय वायु सेना’ ने इन विपदा में फ़से यात्रियों की मदद की और इन्हें वहां से बचाया. Dixit ने कहा कि…

एक सुनसान जगह 6 दिन तक 6 से 7 फुट बर्फ में फ़से हम सभी लोगों ने एक नया परिवार पाया है! हम सभी लोगों में एक पूरा हिन्दुस्तान सांसें ले रहा था. इसमें शामिल लोगों में पूर्व सेना कर्मी, ट्रक ड्राइवर, अधेड़ उम्र का व्यक्ति, और 5 साल की उम्र का एक बच्चा भी शामिल था. हम सब ने इन कठिन परिस्थितियों का एक दुसरे का साथ देते हुए मिलजुल कर सामना किया. आज हम खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि हम ज़िंदा हैं और हमें दिन में एक बार एक साथ किये हुए भोजन में से किसी को हिस्सा नहीं देना पड़ रहा है. उन स्थितियों में रात का न्यूनतम तापमान -16 डिग्री तक गिर जाता था. अंततः 3 दिनों के तूफानी बरसात, बर्फबारी झलने के बाद सूर्य देवता ने हम पर कृपा की. आख़िरकार छठवें दिन #IndianAirForce के रूप में हम लोगों तक मदद पहुंची और साहसी जवानों ने हमें लाहौल-स्पिति के उस खतरनाक इलाके से बचाया.

आप सब लोगों की प्रार्थनाओं, दुआओं और सार्थक सोच का तहे-दिल से शुक्रिया. अपने सभी जो इस आपदा से निकल कर आये हैं का भी एक दुसरे का साथ दने के लिए धन्यवाद और सबसे बड़ा धन्यवाद #IndianAirForce का जिसने हमें बचाने के लिए इस जांबाज़ी का प्रदर्शन किया.

हम अपने सभी शुभचिंतकों, परिवारजनों, सहकर्मियों, और दोस्तों से क्षमा मांगते हैं. हमें पता है की आप हमारे अस्तित्व को लेकर कितने डरे रहे. और हम इस बात की प्रार्थना करते हैं कि ऐसी भयावह दुर्घटना का सामना हमारे दुश्मन को भी न करना पड़े.

Anurag Dixit का यह पोस्ट हिमालय के पहाड़ी रास्तों से मुक़ाबले में आने वाले अस्तित्व के खतरों को बखूबी दर्शाता है. इन वादियों का मौसम और रास्ते पलक झपकते ही बारिश और बर्फबारी के रूप में अपना रंग बदल कर आपको बहुत ही बड़े खतरे में डाल सकते हैं. तो इसलिए इस बात को सुनिश्चित कर लें कि ऐसी यात्रा पर जाने से पहले आप खुद को उस बेमिजाज़ मौसम के अनुसार ढल लें और ये भी कि आपकी राइड के दौरान किसी अप्रत्याशित घटना से निपटने के लिए आपकी तैयारी पूरी हो.

और यह भी ध्यान रहे कि आपके पास किसी भी सुनसान इलाके में अप्रत्याशित आपदा में फसने के लिहाज़ से कम से कम 1-2 हफ्तों की रसद हमेशा ही मौजूद हो. कई बाइकर्स अकेले ही ऐसी खतरनाक राइड्स पर जाना पसंद करते हैं लेकिन कोशिश कीजिए कि आप हमेशा एक समूह के साथ निकलें ताकि किसी भी विपदा में फसने पर आपकी मदद के लिए कोई न कोई साथ हो.

कभी कभी कुछ लोग सिर्फ रोमांच के लिए बहुत ही जानलेवा मौसम में भी ऐसे दूरदराज़ इलाकों में राइडिंग करने चले जाते हैं जो उनके खुद के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं. और हर कोई Anurag Dixit और उनके साथियों की तरह खुशकिस्मत नहीं होता की उन्हें सेना का सहारा मिल जाये.

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