Goa में पार्टी करने वाले सावधान! शराब पीकर गाड़ी चलाने पर हो सकती है 7 दिन की जेल!

ड्राइवर्स को शराब से दूर रखने के लिए गोवा पुलिस राज्य सरकार को Motor Vehicle Act के नियमों में संशोधन के लिए इनपुट देने वाली है. प्रस्तावित संशोधन के तहत, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को बेल मिलने से पहले पुलिस फ़ोर्स उन्हें कम से कम 7 दिनों तक जेल में रख सकती है.

Motor Vehicle Act, 1988 की धारा 185 के तहत खून में 30 मिलीग्राम/100 एमएल से ज्यादा मात्र में शराब होने पर गाड़ी चलाना दंडनीय अपराध है. 1988 में आये इस  धारा के तहत नियम तोड़ने वालों को केवल कुछ 100 रूपए ही जुर्माना देना होता है. कई पुलिसकर्मियों ने बताया है की चुकी रूपए की वैल्यू घट गयी है, लोगों पर ये जुर्माना ज़्यादा असरदार साबित नहीं हो रहा है. इस धारा में संशोधन कर जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव अभी भी संसद में लंबित है.

पुलिस DGP Muktesh Chander ने कहा, “अदालतों ने इस मामले में ढीलाई ही बरती है. जुर्माना लगाने से मुश्किल से ही कुछ रुकता है, और जेल जाने का दंड कम ही दिया जाता है. इसके फलस्वरूप शराब पीकर गाड़ी चलाने की दिक्कत पर काबू नहीं हो पाया है. ऐसे केस संयोजनीय नहीं होते इसलिए इन्हें हमेशा अदलात में ही भेज दिया जाता है.” Chander ने आगे बताया, “लाइसेंस निलंबित करने का निर्देश देना अदालत के ऊपर निर्भर करता है. कई मामलों में नियम तोड़ने वाला जेल में एक रात भी नहीं बिताता. मैं बाकी देशों में क़ानून और दूसरे राज्यों एवं शहरों के दंड का पैटर्न देखना चाहता हूँ. अगर इस तरह से नियम तोड़ने के लिए Bengaluru, Hyderabad और Secundarabad में लोग जेल जा सकते हैं, तो Goa में क्यों हैं?”

पुलिस ऑफिसर ने ये भी कहा की वो Motor Vehicle Act में संशोधन का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन अगर ये जल्दी नहीं होता है, वो राज्य सरकार से सिफारिश करेंगे की क़ानून बदला जाए और इसे तोड़ने वालों के लिए कम से कम 7 दिनों की सजा का प्रावधान किया जाए. नार्थ गोवा के ट्रैफिक उप-महानिरीक्षक Dharmesh Angle ने कहा की पिछले कुछ सालों में शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों में वृद्धि हुई है. उन्होंने ने कहा की ज़्यादा टूरिस्ट, लाइफस्टाइल में बदलाव, और गाड़ियों की बढती तादाद इसके लिए जिम्मेवार है. उन्होंने आगे कहा “जुर्मानों को अब अदलात के मुताबिक़ लगाया जा रहा है, लेकिन हम ज़्यादा सख्त कार्यवाही करना चाहते हैं ताकि ये चीज़ रुके.”

सोर्स — Times of India