Delhi High Court ने लगायी Bull Bar Ban पर रोक

एक चौंकाने वाले कदम में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र की सभी राज्यों को बुल बार इस्तेमाल कर रहे कार्स और SUVs के खिलाफ कदम उठाने के निर्देश वाले अधिसूचना पर रोक लगा दी है. ये आर्डर कार्यकारी मुख्य न्यायधीश Gita Mittal और न्यायधीश C Hari Shankar की बेंच से आया. उन्होंने परिवहन मंत्रालय को इस मामले को दुबारा देखने को कहा है. और तो और, उसने ये आदेश दिया है की अगली सुनवाई की तारीख अप्रैल 18 तक बुल बार के इस्तेमाल के लिए कोई भी चालान नहीं काटा जाए.

बेंच ने कहा “आपने किस ताकत के तहत ये अधिसूचना जारी की है? किस क़ानून के तहत आपने राज्यों को ये सलाह जारी की कि वो नियम तोड़ने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाई करें? इस पर अगली तारीख तक रोक लगी रहेगी और कोई चालान जारी नहीं किया जायेगा.” हाई कोर्ट ने ये भी कहा की परिवहन मंत्रालय ने Motor Vehicle Act की व्याख्या सही से नहीं की है और उसे कोर्ट को विस्तार से जवाब देना होगा. इसके पहले पिछले साल दिसम्बर में मंत्रालय ने राज्यों में परिवहन के प्रमुख सचिवों, सचिवों, और कमिश्नर्स को ये कहते हुए पत्र लिखा था की “ये बात आपके ध्यान में लायी जाती है की क्रैश गार्ड/बुलबार को लगाना Motor Vehicles Act, 1988 के अनुच्छेद 52 का उल्लंघन है और ये Motor Vehicles Act, 1988 के अनुच्छेदों 191 एवं 192 के तहत दंडात्मक है.”

मंत्रालय का कहना था “गाड़ियों में क्रैश गार्ड या बुल बार राहगीरों या गाड़ी के मालिकों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं. इसलिए इस बात की प्रार्थना की जाती है की राज्य गाड़ियों में ऐसे क्रैश गार्ड या बुल बार्स के अनाधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी कारवाई करें.”

Motor Vehicles Act, 1988 का अनुच्छेद 190 ये कहता है की जो कोई व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक स्थान में मोटर यान ऐसे चलाएगा या चलवायेगा या चलाने देगा जिससे सड़क सुरक्षा, शोर नियंत्रण, और वायु प्रदूषण के सम्बन्ध में विहित मानकों का उल्लंघन होता है तो वह प्रथम अपराध के लिए एक हज़ार रूपए जुर्माने से, तथा किसी द्वितीय या पश्चातवर्ती अपराध के लिए दो हज़ार रूपए तक के जुर्माने से, दण्डित होगा.

दिल्ली हाई कोर्ट Mohammed Arif की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, वो बुल बार्स के निर्माता एवं डीलर हैं और वो मंत्रालय के राज्यों को बुल बार के इस्तेमाल पर दण्डित करने के निर्देश पर रोक चाहते हैं. Arif का कहना था की केंद्र के बुलबार्स को प्रतिबंधित करने के फैसले की कोई वैधता नहीं है क्योंकि ऐसे एक्सेसरीज की बात करने वाला कोई क़ानून नहीं है. इसके अलावा उनका कहना है की बुल बार्स Motor Vehicle Act के अनुच्छेद 52 के तहत नहीं आते क्योंकि ये धारा गाड़ी के बॉडी में किये गए बदलावों के लिए है, और अतिरिक्त फिटिंग के लिए नहीं.

Section 191 का कहना है की “जो कोई मोटर यान का आयातकर्ता या व्यापारी होते हुए मोटर यान या ट्रेलर का ऐसी हालत में विक्रय या परिदान करेगा अथवा विक्रय या परिदान की प्रस्थापना करेगा जिससे सार्वजनिक स्थान में उसके उपयोग से अध्याय 7 का या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन होगा अथवा मोटर यान या ट्रेलर को ऐसे परिवर्तित करेगा कि उसकी ऐसी हालत हो जाए जिससे सावर्जिनक स्थान में उसके उपयोग से अध्याय 7 का या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन होगा, वह जुमार्ने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा.”

यहाँ इस बात पर ध्यान देने की ज़रुरत है की हाई कोर्ट से ताज़ा आदेश केवल एक रोक है जिसका मतलब ये है की बुल बार इस्तेमाल करने वालों के लिए अधिकतम एक तात्कालिक राहत है. अगली सुनवाई में सरकार बेहतर बचाव करेगी. और अगर कोर्ट फिर भी बुल बार के इस्तेमाल पर लगे बैन को हटा देता है, सरकार बुल बार पर प्रतिबन्ध के लिए Motor Vehicle Act में कभी भी संशोधन कर सकती है.

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