Car & Motorcycle Wraps in India: Anything and Everything You Need to Know कार/बाइक्स को रैप करवाने की प्रक्रिया और इससे जुड़े हर सवाल का जवाब...

कार/बाइक्स को रैप करवाने की प्रक्रिया और इससे जुड़े हर सवाल का जवाब…

दिन-प्रतिदिन रैप्स काफी प्रसिद्ध होते जा रहे हैं क्योंकि ये मॉडिफिकेशन का एक बेहद आसान रास्ता हैं. ऐसा इसिये क्योंकि रैप करवाने पर गाड़ी में किसी प्रकार के मैकेनिकल बदलाव नहीं होता और इन्हें कुछ समय के बाद आसानी से हटाया जा सकता है. लेकिन, रैप्स को लेकर लोगों के बीच अभी भी कुछ सवाल हैं और नीचे दिए गए विडियो में यूट्यूबर Dream Drive Destiny ऐसे सवालों का जवाब दे रहे हैं.

ये सवाल और इनके जवाब हर तरह की गाड़ियों – मोटरसाइकिल्स, स्कूटर्स, कार्स और SUVs पर लागू होते हैं.

Mahindra Xuv500

इस Youtuber ने हाल ही में अपनी Bajaj Dominar 400 को काले और सफ़ेद कैमोफ्लाज रैप करवाया था (जिसे उन्होंने किसी के द्वारा जानबूझकर क्षतिग्रस्त किये जाने के बाद हटवाया था). वो रैप्स से संबंधित कई सवालों का जवाब देते हैं. आइये इन सवालों के बारे में बात करते हैं.

क्या रैप्स कानूनी हैं?

सबसे पहला सवाल जिसका जवाब युट्यूबर देते हैं वो है: क्या भारत में रैप कानूनी हैं? युट्यूबर कहते हैं की अगर सख्ती से देखें तो नहीं. रैप्स की मदद से लोग अपनी गाड़ी का रंग आसानी से बदल लेते हैं और अगर ऐसे में गाड़ी चोरी हो जाती है, तो बड़ी दिक्कत कड़ी हो सकती है. लेकिन, दूसरे ऑप्शन जिनसे आपकी गाड़ी का रंग नहीं बदलता उसमें कोई दिक्कत नहीं है और Maruti जैसे कुछ निर्माता ये ऑप्शन देते भी हैं.

Hyundai Elite I20

क्या ऐसा कोई तरीका है जिससे आप अपनी गाड़ी को रैप करा कर कानूनी पचड़े से बच सकते हैं?

इसका जवाब है हाँ, लेकिन इसमें भी एक बड़ी शर्त है. युट्यूबर बताते हैं की ऐसे लोग जिन्हें अपनी गाड़ी को रैप कराना है तो उन्हें अपनी गाड़ी के रंग का ही रैप करवाना चाहिए. अगर रंग ओरिजिनल या उसी तरह का है, तो आपको पुलिस परेशान नहीं करेगी. हाँ, हमारा भी कुछ ऐसा ही कहना है, पुलिस इस बात की चिंता नहीं करती की उसी रंग का रैप कानूनी है या नहीं. इसपर बात तभी साफ़ हो सकेगी जबतक इसपर कोर्ट का फैसला नहीं आता या राज्यों के Motor Vehicle Department कोई नियम नहीं लाते.

क्या रैप टिकाऊ होते हैं?

Motorcycle

इस सवाल का जवाब रैप हो रही कार या बाइक के मालिक पर निर्भर है. लेकिन, एक बात साफ़ कर दें की रैप पेंट जितना नहीं टिकते क्योंकि वो विनाइल जैसे पदार्थ से बने होते हैं जिनको क्षति जल्दी पहुँचती है. ये इस्तेमाल किये गए मटेरियल या गाड़ी के मेंटेनेंस पर निर्भर करता है. भारत के मौसम में ये बात ज्यादा ज़रूरी हो जाती है. साथ ही अगर आप लम्बी राइड या ड्राइव के लिए जाते हैं और गाड़ी पर सामान बांधते हैं तो आपका रैप इससे डैमेज हो सकता है.

क्या आपको रैप करवाने के बाद अपनी गाड़ी को फिर से रजिस्टर कराना होगा?

इस सवाल का जवाब है, नहीं. गाड़ी को रैप करवाने पर उसे दुबारा से रजिस्टर करवाने की ज़रुरत नहीं होती. लेकिन, दुबारा पेंट करवाने से गाड़ी को दुबारा रजिस्टर करवाना होता है. अगर कोई दिक्कत आई तो रैप को आसानी से हटाया जा सकता है लेकिन नए पेंट को नहीं हटाया जा सकता है और इसी के चलते इसे RC पर भी दर्शाना होता है.

आपको गाड़ी कहाँ रैप करवानी चाहिए और कैसे रैप इस्तेमाल करने चाहिए?

रैप करवाना आसान काम नहीं है और इस्तेमाल हुए मटेरियल को काटने के लिए ब्लेड की ज़रुरत होती है. यूट्यूबर के मुताबिक़ हमें जाने-माने कस्टमाईजेशन हाउस के पास जाना चाहिए और उनके मुताबिक़ 3M मटेरियल का इस्तेमाल करना चाहिए. ये हर जाने-माने कस्टमाईज़र के पास मिल जाता है. अगर हो सके तो उनके द्वारा किये गए पिछले काम पर एक नज़र डाल लें. याद रखें, खराब रैप को हटाते हुए आपके पेंट को नुक्सान पहुँच सकता है इसलिए इनसे बचने की हरसंभव कोशिश करें.

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