सभी कार/मोटरसाइकिल मॉडिफिकेशन हैं गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दो जजों की एक बेंच के ज़रिये केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है जिसमें या कहा गया था की किसी भी गाड़ी में ‘ढाँचे से जुड़े बदलाव’ किये जा सकते हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की निर्माता के असली स्पेक्स (जैसा की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) के अलावे गाड़ी में किसी भी तरह का मॉडिफिकेशन गैरकानूनी है.

Fortuner Supreme Court

केरल हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है की केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में केवल सेक्शन 52(1) के नियमों पर धयान दिया था, प्रावधानों पर नहीं. इसलिए, उनका आदेश क़ानून पर खरा नहीं उतरता है. नियमों को प्रावधानों पर हावी नहीं होना चाहिए और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में निर्माता के द्वारा दिए गए असल स्पेक्स के अलावे कोई बदलाव नहीं किया जा सकता.

इसका मतलब क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़, चौड़े टायर्स, बड़े अलॉय व्हील्स, और तेज़ हॉर्न जैसे आम मॉडिफिकेशन भी गैरकानूनी हैं. अगर सरकार इस आदेश को सख्ती से लागू करती है तो मॉडिफिकेशन/एक्सेसरी उद्योग के लिए इसका प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है.

लेकिन, सरकार को राज्यों के परिवहन विभाग को सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बारे में सूचित करने में समय लगेगा. एक बार जब ये हो जाएगा, ये देखना बाकी रहेगा की दूसरे राज्यों के परिवहन विभाग और क़ानून-व्यवस्था एजेंसियां मॉडिफाइड गाड़ियों से किस प्रकार से निबटती हैं. एक बार जब परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी होगी, गाड़ी मॉडिफाई करने वाले लोगों को दिक्कतों का सामान करना पड़ सकता है.

क्या ये आदेश कोई नयी बात है?

हाँ. जहां केरल हाई कोर्ट के आदेश में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर उल्लेख करने के बाद गाड़ी में मॉडिफिकेशन किये जा सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश इस बात को बदल देता है. सुप्रीम कोर्ट के कहना है की अगर मॉडिफिकेशन गाड़ी के स्टॉक स्पेक्स से अलग है तो उसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर दर्शाने से भी वो कानूनी नहीं बन जायेंगे.

आगे क्या?

भारत में कार और बाइक एक्सेसरी इंडस्ट्री काफी बड़ी है. इसलिए, इस बात की उम्मीद है की एक्सेसरी निर्माता और कार मॉडिफायर्स सरकार से इस बात की सिफारिश करें एवं कुछ मॉडिफिकेशन के लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव किये जाएँ. अगर ऐसा होता है तो थोड़े मॉडिफिकेशन किये जा सकेंगे. इससे एक्सेसरी निर्माता अपना उद्योग जारी रख पायेंगे और इस बात को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा की मॉडिफाइड गाड़ियाँ नियमों की अनदेखी ना करें. यहाँ सरकार का दखल ज़रूरी होगा और हम उम्मीद करते हैं की वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्यान देकर ज़रूरी कार्यवाही करेगी.