Bullbar Ban! Tamil Nadu, Jharkhand के बाद और कौन से States?

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के द्वारा राज्यों को गाड़ियों में बुल बार के इस्तेमाल को लेकर भेजा गया आदेश अब कई राज्यों के पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है . पिछले हफ्ते तमिलनाडु और झारखण्ड के द्वारा बुल बार के खिलाफ मुहीम की घोषणा के बाद अब झारखण्ड के पुलिस डिपार्टमेंट ने गाड़ियों में बुल बार के खिलाफ कार्यवाही भी शुरू कर दी है. यहाँ आप देख सकते हैं एक Mahindra Scorpio एसयूवी को रोका जा रहा है और बुलबार के इस्तेमाल के लिए उसे फाइन किया जा रहा है. यहाँ ये भी देखा जा सकता है की पुलिस वाले मौके पर से ही बुल बार हटा रहे हैं. ऐसे बुल बार को ज़ब्त करके उन्हें नष्ट कर दिया जायेगा.

आने वाले हफ़्तों में जब भारत के अन्य राज्यों के परिवहन और पुलिस विभाग बुल बार के खिलाफ कार्यवाही करने लगेंगे तब ये मुहीम और तेज़ हो जाएगी. भारतीय राज्यों के ट्रांसपोर्ट कमिश्नरों को अपने पत्र में केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने ये बात बताई है की Motor Vehicle Act के धारा 52 के तहत बुल बार गैरकानूनी हैं और दुसरे धाराओं के अन्दर उनपर दंड का प्रावधान है. उसमें यह भी कहा गया है की बुलबार गाड़ी में एयरबैग खुलने में अवरोध डाल सकते हैं और एक्सीडेंट के दौरान वो राहगीर और रोड पर दुसरे लोगों को गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं.

हाल ही में अपने आप को एक बुल बार निर्माता और डीलर बताने वाले इंसान ने अपने आप को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सुनी जा रही एक जनहित याचिका में पार्टी बना लिया. इस एप्लीकेशन में उसने ये बात आगे रखी है की Motor Vehicle Act की धारा 52 आफ्टर-मार्केट फिटिंग नहीं बल्कि सिर्फ मॉडिफिकेशन की बात करती है.अपने एप्लीकेशन में उसने कहा है की बुल बार आफ्टरमार्केट फिटमेंट है और इसीलिए धारा 52 के अन्दर नहीं आता. उसने बुल बार के सम्बन्धित केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के पत्र जो गैरकानूनी भी कहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट इस याचिका की सुनवाई 6 February 2018 को करेगी, उसके बाद ये उम्मीद है की वो परिवहन मंत्रालय के इंडिया में गाड़ियों में बुल बार के इस्तेमाल के खिलाफ पत्र के कानूनी वैधता पर एक स्पष्ट आर्डर देगी. अभी के लिए, कोर्ट बुल बार पर प्रतिबन्ध के समर्थन में है और उसने ये भी कहा है की “इंसानी ज़िन्दगी बुल बार लगाने से ज्यादा ज़रूरी है”.

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