अभिभावकों ने बच्चे को कार के अंदर किया बंद: जागरूक निवासियों ने बचायी जान

त्योहारों के इस मौसम में खरीददारी पर निकले बहुत से लोग दुकानों पर खाली हाथ पहुंचना सुविधाजनक मानते हैं. मेरठ में एक छोटे बच्चे के अभिभावक बच्चे को गाड़ी के अंदर छोड़ कर खुद खरीददारी करने के लिए निकल गए. इस बच्चे को स्थानीय लोगों ने गाड़ी के अंदर डरी हुई अवस्था में पाया तो गाड़ी की खिड़की का शीशा तोड़ बच्चे को बाहर निकला.

Child Inside Car

ये वाकया 5 नवम्बर को मेरठ के चहल-पहल भरे सेन्ट्रल मार्केट में सामने आया. स्थानीय लोगों ने इस पार्क कि हुई गाड़ी के अंदर बच्चे को बंद पाया. थोड़ी देर इस बच्चे के अभिभावकों की खोजबीन कर गाड़ी की खिड़की के शीशे को तोड़ बच्चे को बाहर निकला गया. इस बात की जानकारी नहीं है कि क्या गाड़ी का AC चल रहा था या नहीं पर बहुत संभावित है कि गाड़ी का इंजन बंद था और अपनी बच्ची को गाड़ी में बंद कर उसके अभिभावक खरीददारी में व्यस्त थे. हमेशा की तरह पुलिस का आगमन बाद में हुआ और पुलिस ने बच्ची के अभिभावकों को दोबारा इस किस्म की हरकत न करने की चेतावनी भी दी.

इस किस्म के वाकये जहाँ अभिभावक अपने छोटे बच्चों को गाड़ी में छोड़ कर खरीददारी के लिए चले जाते हैं अक्सर ही देखने में आते हैं. कई जगह तो पालतू जानवरों को गाड़ी के अंदर बंद पाया गया है. विदेशों में तो ऐसी घटनाएं आम हैं लेकिन अब भारत में भी इसका प्रचलन बढ़ रहा है. बिना AC चालू किए अपने बच्चों या पालतू  जानवरों को गाड़ी के अंदर बंद करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

बिना AC धूप में खड़ी चारों ओर से बंद गाड़ी के अंदर का तापमान ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट के चलते बेहद तीव्रता से बढ़ सकता है. कई अध्ययनों के अनुसार खुली पार्किंग में सीधी धुप के नीचे खड़ी गाड़ी के अंदर का तापमान केवल 10 मिनट में ही 20 डिग्री तक बढ़ सकता है. और एक घंटे में यह तापमान 40 डिग्री को छू सकता है. इस अवस्था में खड़े वाहनों का केबिन बेहद तीव्रता से गर्म हो सकता है.

इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एक व्यस्क की तुलना में बच्चों के शरीर का तापमान बहुत तेज़ी गिरता-बढ़ता है. बच्चों में अपने शरीर के तापमान को संतुलित कर पाने की क्षमता का पूरा विकास नहीं हो पाता. छोटे बच्चे ऐसी परिस्थितियों में भीषण हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं. यहाँ तक की उनकी जान भी जा सकती है. ऐसी कई दुर्घटनाएं सामने आईं हैं जहाँ बच्चों को भीषण गर्मी के चलते जान गंवानी पड़ी है. ऐसा ही पालतू जानवरों के मामले में भी सामने आया है.

साथ ही बच्चों को कार में अकेला छोड़े जाने के बहुत से अन्य खतरनाक दुष्प्रभाव हो सकते हैं. गाड़ी की सीट से गिर कर बच्चे चोटिल हो सकते हैं. साथ ही अकेलेपन में घबरा कर रोने भी लग सकते हैं. वैसे भारत में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई नियम नहीं हैं. मेरठ वाले मामले में पुलिस ने बच्चे के अभिभावकों को सख्त चेतावनी दे कर जाने दिया.

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