क्यों लगाया Indian Government ने Cars और SUV में Bull-Bar पर बैन...

क्यों लगाया Indian Government ने Cars और SUV में Bull-Bar पर बैन…

भारत सरकार के रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मंत्रालय ने कार्स और एसयूवी में बुल-बार लगाने पर बैन लगा दिया है. पेश हैं 5 मुख्य कारण जिसके चलते ये फेमस एक्सेसरी — जो कुछ कार निर्माता खुद बेचते हैं — पर बैन लगाया गया है.

बुल-बार गैरकानूनी है

मोटर व्हीकल एक्ट के धारा 52 के तहत “किसी भी मोटर व्हीकल का मालिक अपनी गाड़ी में इस तरह के बदलाव नहीं कर सकता की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में लिखे गए पर्टिकुलर निर्माता के द्वारा बताये गए ओरिजिनल से भिन्न हो”. कार निर्माता अपने कार्स में बुल-बार लगाने को अप्रूव नहीं करते जिसका मतलब ये है की जब कार मालिक आफ्टरमार्केट एक्सेसरी के रूप में इसे लगा रहा है वो एक गैरकानूनी काम कर रहा है.

बुल-बार के चलते क्रम्पल-जोन काम नहीं करते

कर निर्माता गाड़ी को सुरक्षित बनाने में लाखों रूपए खर्च करते हैं. क्रम्पल-जोन कार के आगे की ओर होते हैं और इनमें बम्पर, ग्रिल, रेडियेटर, बोनट, और दूसरे पार्ट्स शामिल होते हैं. जब एक कार में बुल-बार लगाया जाता है, ये एक्सीडेंट के दौरान गाड़ी के क्रम्पल-जोन को काम करने से रोकते हैं. और इसके चलते क्रैश का फ़ोर्स कार के अन्दर के लोगों को ट्रान्सफर हो जाता है जिससे गंभीर चोटें आ सकती हैं, और मौत भी हो सकती है.

एक्सीडेंट के दौरान बुल-बार एयरबैग के खुलने में अवरोध डाल सकते हैं

बुल-बार एयरबैग सेंसर के सही से काम करने के प्रोसेस में बाधा डाल कर उनके डिप्लॉयमेंट में भी अवरोध डाल सकते हैं. इससे क्रैश के दौरान हो सकता है वो गलत समय पर खुलें या फॉर खुलें ही ना. दोनों ही परिस्थितियाँ गाड़ी के अन्दर बैठे लोगों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती हैं. ये एक बड़ा कारण है की कई ऑटोमेकर और बीमा कम्पनियाँ बुल-बार को एक्सेसरी बनाने की इजाज़त नहीं देतीं.

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बुल-बार राहगीरों, साइकिल चलाने वालों, और टू-व्हीलर्स के लिए खतरनाक होती है

रोड पर सिर्फ कार्स नहीं चला करती हैं. राहगीर, साइकल चलाने वाले, और टू-व्हीलर राइडर भी रोड पर चलते हैं और दुनियाभर की सरकारें ऐसे नियम पास कर रही हैं जो कार्स को रोड-फ्रेंडली बनाएं. इसमें ऐसे बम्पर और बोनट भी शामिल हैं जो राहगीरों से टकराने पर भी क्रम्पल हो जाएँ. यहाँ तक की Volvo ने अपने कार में राहगीरों के लिए भी एयरबैग लगाया है. क्रैश के दौरान बुल-बार राहगीर, साइकिलिस्ट, और टू-व्हीलर राइडर को चोट पहुंचाती हैं, यहाँ तक की कभी कभार उनके मौत का भी सबब बन जाती हैं.

बड़े एक्सीडेंट के दौरांन बुल-बार कार के चेसी को नुक्सान पहुंचाती हैं

बड़े एक्सीडेंट के दौरान बुल-बार न सिर्फ एयरबैग और क्रम्पल-जोन के कार्य में बाधा डालती हैं बल्कि दोनों गाड़ियों के चेसी को भी काफी नुक्सान पहुंचा सकती हैं. इससे एक्सीडेंट में शामिल दूसरी गाड़ी को भी काफी नुक्सान होता है और ये फ़ोर्स दूसरी गाड़ी के के अन्दर बैठे लोगों तक ट्रान्सफर हो जाता है.

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