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10 कारण जिनकी वजह से भारतीय सड़कों पर सुपरकार्स और सुपरबाइक्स चलाना है टेड़ी खीर

भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और भारत के एक आर्थिक शक्ति बनकर उभरने के कारण हम अब देश के लोगों को बहुत अधिक शक्तिशाली सुपरकार्स और सुपरबाइक्स पर ज़्यादा खर्च करते हुए देख सकते हैं. आज आप लोगों को पहले से कहीं ज़्यादा अपनी नई सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को सड़कों पर चलाते देख सकते हैं. वैसे अधिकतर लोगों के लिए इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को चलाना अपने आप में एक मुश्किल काम है खासकर भारतीय सड़कों पर. इस लेख में हम आपके साथ उन कारणों को साझा करने वाले हैं जिनकी वजह से भारतीय सड़कों पर इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को चलाना एक टेड़ी खीर है.

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10 कारण जिनकी वजह से भारतीय सड़कों पर सुपरकार्स और सुपरबाइक्स चलाना है टेड़ी खीर

भारत में इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को पहली बार खरीदने वाला एक बहुत बड़ा वर्ग इससे पहले साधरण कार्स और बाइक्स को चलाने का आदि हुआ करता था. भारत में कोई भी व्यक्ति जिसके पास एक साधारण ड्राइविंग लाइसेंस है वो इन सुपरकार्स या सुपरबाइक्स को खरीद सकता है भले ही उसके पास इन हाई-पावर गाड़ियों में मुहैया अतिरिक्त ताकत सम्भालने का हुनर हो या न हो.

ब्रिटेन जैसे देशों में उच्च-शक्ति वाली सुपरबाइक्स लेने से पहले आपको एक विशेष किस्म का लाइसेंस हासिल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता होती है ताकि आप इन गाड़ियों में मौजूद अतिरक्त पावर को संभाल सकें. इस ही किस्म की प्रक्रिया का इस्तेमाल भारत में भी किया जाना चाहिए ताकि इन उच्च पावर वाली बाइक्स के मालिक इनको सुरक्षित रूप से चला पाएं, विशेषकर ऊटपटांग भारतीय सड़कों पर.

जागरूकता का आभाव

विशेष लाइसेंसिंग प्रक्रिया के आभाव के सिवा इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स का पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग इन गाड़ियों के बारे में जागरूक नहीं होते. इन लोगों में से अधिकतर को यह इल्म ही नहीं होता कि उनके पास इतनी शक्तिशाली गाड़ियों को संभाल पाने की दक्षता ही नहीं है. ये लोग इनके साथ अपनी साधारण कार्स या बाइक्स जैसा बर्ताव करने लगते हैं. न ही बच्चे और न ही उनके अभिभावक इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को लापरवाही के साथ चलाने के साथ जुड़े विनाशकारी खतरों से वाकिफ होते हैं. इन महाशक्तिशाली गाड़ियों की ताकत को ज़िम्मेदारी के साथ संभालने के लिए ज़रूरी प्रशिक्षण के बिना इनकी ड्राइविंग/राइडिंग के नतीजे अक्सर अंत में आंसुओं और मातम का कारण बनते हैं.

पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय सड़कें कहीं ज़्यादा खतरनाक हैं

10 कारण जिनकी वजह से भारतीय सड़कों पर सुपरकार्स और सुपरबाइक्स चलाना है टेड़ी खीर

सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को कण्ट्रोल करना कोई आसान काम नहीं है और ये गाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार केवल 4 सेकंड में पकड़ लेने की क्षमता रखती हैं. भारतीय सड़कें दुनिया भर की सड़कों में सबसे ज़्यादा बदमिजाज़ हैं जिन पर किसी क्षण आपका सामना किसी अप्रत्याशित और अनिश्चित अवरोध से हो सकता है. इन सड़कों पर चलते हुए आपके सामने अचानक ही कोई पशुओं के झुण्ड या गड्ढा आ सकता है. वैसे तो ये गाड़ियां तेज़ रफ्तार पर भी संतुलित रहती हैं लेकिन कई बार अचानक ही सामने आई किसी बाधा से बचने के लिए सही कदम उठा पाने का समय ही नहीं मिल पाता जिसके नतीजे गाड़ी चला रहे या गाड़ी में बैठे लोगों के लिए भयावह हो सकते हैं.

सुपरकार्स की आजू-बाजू और पीछे की ओर विज़िबिलिटी का स्तर अच्छा नहीं होता

सुपरकार्स  को रफ्तार के लिए बनाया जाता है और इनमें से अधिकतर के पीछे की ओर बड़े बड़े रियर विंग लगे होते हैं. इनकी ऐरोडायनैमिक कलाकारी या शक्तिशाली इंजन की सही कूलिंग के चलते इनकी पीछे वाली खिड़की बहुत ही छोटे आकार की होती है. साथ ही इन सुपरकार्स की सीटिंग ज़मीन के काफी करीब होती है और इनकी छोटी-छोटी साइड वाली खिड़कियां विज़िबिलिटी में बाधा होती हैं. यह भारतीय सड़कों के हिसाब से बेहद खतरनाक होता है जहां लोग आदतन ट्रैफिक नियमों को तोड़ रेडलाइट जम्प कर अचानक ही कहीं से भी बीच सड़क पर आ टपकते हैं. ऐसे ही जब आप सड़क पर अपनी सुपरबाइक या सुपरकार के ताकतवर ब्रेक्स लगाते हैं तो इस खतरे को मोल लेते हैं कि आपके पीछे आ रहा वाहन उस ही तेज़ी से रुक पाएगा जिस तेज़ी से आप रुक रहे हैं. और ऐसे हालात में ये आपकी महंगी सुपर कार के पिछले हिस्से के लिए नुकसान दायक हो सकता है.

इन कार्स और बाइक्स की पूरी क्षमताओं का मज़ा लेने के लिए ट्रैक्स की कमी

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सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकों के पास इन बिजली की सी तेज़ गाड़ियों की असल क्षमताओं को सुरक्षा के साथ मज़ा लेने के लिए कोई जगह ही नहीं है. इनमें से अधिकतर सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को रेसिंग ट्रैक्स या ड्रैग स्ट्रिप्स पर ही चलाने के लिए बनाया गया है. लेकिन ये दुखद है की भारत में ऐसी सुविधा बहुत कम मौजूद हैं. ग्रेटर नॉएडा में Buddh International Formula One Circuit, तमिलनाडु में एक-दो ट्रैक्स, और कुछ एक बंद पड़ीं हवाई-पट्टी के सिवा भारतवासियों के पास अपनी सुपरकार्स और सुपरबाइक्स की क्षमताओं को परखने और उनको चलाने में दक्षता हासिल करने के लिए कोई मुनासिब जगह नहीं है.

उपयुक्त ट्रेनिंग सुविधाओं का आभाव

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रेसिंग ट्रैक्स की कमी के चलते सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के ऐसे ट्रेनिंग सेंटर्स का भी अभाव है जहाँ इन तेज़ गाड़ियों के मालिक इनको चला पाने में दक्षता हासिल कर सकें. भारत में आपको इन गाड़ियों के अनेकों ऐसे मालिक मिल जाएंगे जो आम रास्तों पर ही इन गाड़ियों को चलाने के कौशल को हासिल करने की कोशिश करते हैं, भले ही ये इनको चलाने वाले और सड़क पर अन्य लोगों के लिए कितना भी खतरा क्यों न पैदा करे. इन सुपर कार्स की पावर को ध्यान में रखते हुए यह  पक्का है कि बिना सही ट्रेनिंग के आम सड़कों पर इन गाड़ियों की ड्राइविंग/राइडिंग पर दक्षता हासिल करने के दौरान दुर्घटना हो सकतीं हैं.

भारत में कमज़ोर कानून व्यवस्था

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एक और कारण जो भारत में इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के लिए मुसीबत है वह है पुलिस द्वारा क़ानून सही तरह से लागू ना करवा पाना. पुलिसवालों की क़ानून का पालन करवाने के प्रति असमर्थता या कहीं-कहीं अनिच्छा के चलते अनेकों सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिक पुलिस द्वारा पकड़ लिए जाने की परवाह भी नहीं करते.

क़ानून के प्रहरियों के प्रति डर का ये आभाव इन महंगी सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकों को सड़क पर दूसरे की जान की परवाह किये बगैर अपने जुनून की पूर्ति कर लेने का हौसला देता है. हम आये दिन अखबारों में अनेकों सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को चलाने वालों की बेहद तेज़ एवं गैरकानूनी रफ्तार में गाड़ी पर अपना काबू खो देने के चलते मौतों की खबरें पढ़ते हैं. अडिग पुलिस और कड़े क़ानून इस बात को सुनिश्चित कर सकते हैं कि सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिक ड्राइव के दौरान किसी भी बेवकूफाना हरकत को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचें.

सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकों से पंगे लेने वाले सरफ़िरों की कमी नहीं ग़ालिब

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सुपरकार्स और सुपरबाइक्स भारतीय सड़कों पर अभी तक एक आम नज़ारा नहीं हैं. इन्हें सड़क पर देखते ही बहुत से लोग एक छोटे बच्चे की लॉलीपॉप की ज़िद जैसा व्यवहार करने लगते हैं. और इस ही दीवानगी में वो इन गाड़ियों के करीब जाने, उनको छू कर देखने, या फिर इनके साथ सेल्फी लेने के लिए अपनी जी जान लगा देते हैं. जहां एक ओर इनकी ये दीवानगी जायज़ है लेकिन ये सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकों के लिए परेशानी का सबब भी बनती है.

सड़क पर चल रहे आम आदमी की ये बेवकूफाना हरकतें कभी-कभी इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स में जा कर ठुक जाने का कारण भी बनती हैं और इसका खामियाज़ा इन गाड़ियों के मालिकों को ऊंची कीमतों की मरम्मत और उनके बहुमूल्य समय के नुकसान के रूप में चुकाना पड़ता है. ये एक और जोखिम है जो इन महंगी कार्स और बाइक्स के मालिकों को अपनी इन गाड़ियों की सवारी के दौरान उठाना पड़ता है.

जनता दोष हमेशा सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकों के सर ही मढ़ती है

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ऐसी अनेकों घटनाएं सामने आती हैं जब सस्ती और कम शक्तिशाली गाड़ियां इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स में आ कर ठुक जाती हैं. भले ही सस्ते वाहन चालक की लाख गलती रही हो लेकिन सड़क पर खड़े आम लोग दुर्घटना का पूरा दोष सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिक पर ही मढ़ने लगते हैं. ऐसे अनेकों मामले पेश आते हैं जहां शक्तिशाली महंगी गाड़ियों के मालिकों को बिना अपनी किसी ग़लती के ही तमाशबीनों के हाथों बेइज़्ज़त और कभी कभी हमले का भी शिकार होना पड़ा है. ये भी एक पहलु है जो इन महंगी गाड़ियों का मालिक बनना कठिन बनाता है.

निम्न स्तर की स्पीड लिमिट्स

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एक और कारण जो भारत में इन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स के मालिकाने को कठिन बनाता है वो है देश में लागू निम्न स्तर की स्पीड लिमिट्स. भारतीय सड़कों में सुधार और इनके चौड़ीकरण की प्रक्रिया जारी है और इन पर दौड़ने वाली गाड़ियों को रफ्तार भी तेज़ हुई है. लेकिन अब भी इन सड़कों पर लागो स्पीड लिमिट्स ब्रिटिश राज वाली ही हैं. जहां हम एक ओर इस बात से पूरा इत्तेफ़ाक़ रखते हैं कि कार्स को बेतहाशा रफ्तार में दौड़ाने की छूट नहीं होनी चाहिए लेकिन सुपरकार्स और सुपरबाइक्स को 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चला पाने की मजबूरी इनके मालिकों पर ज़ुल्मियत है. लम्हों में नज़रों से ओझल हो जाने की अपनी खानदानी आदत वाली ये सुपरकार्स और सुपरबाइक्स अक्सर ही ओवर-स्पीडिंग के इल्ज़ाम में जुर्माना भी भरते देखीं जाती हैं. लेकिन शायद इसके पीछे का बहुत बड़ा एक कारण है हमारे देश की आदमकाल की स्पीड लिमिट्स.

तसवीरें — 1356789, 10