आपकी कार की लाइफ बढ़ाने के लिए 10 अहम् टिप्स

आधुनिक ऑटोमोबाइल में कई चलने वाले पुर्ज़े होते हैं जो एक दूसरे के साथ मिलकर काम करके वाहन चलाते हैं. हालांकि इन पुर्ज़ो की लाइफ पूरी तरह निर्भर करती है की आप अपने वाहन की किस प्रकार देखरेख करते हैं. ऐसी कई बुरी आदतें हैं जो समय के चलते ड्राइवर्स में विकसित हो जाती हैं और वाहन के जीवन को एक बड़े मार्जिन से कम कर सकती हैं. क्या हैं ये बुरी आदतें और आप इनसे कैसे बच सकते हैं? आइए देखें.

पहाड़ों/ ढलान पर से वाहन उतारते वक्त इंजन बंद ना करें

कई लोग ढलान से उतरते समय वाहन को न्यूट्रल गियर में डाल कर इंजन को बंद कर देते हैं. पहाड़ों या किसी भी ढलान से उतरते वक्त ऐसा करने से इंजन ब्रेकिंग ख़तम हो जाती है और ड्राइवर वाहन की रफ़्तार कंट्रोल करने के लिए पूरी तरह ब्रेक्स पर निर्भर हो जाता है. कुछ देर बाद वाहन के ब्रेक्स गरम हो जाने के कारण बेअसर हो जाते हैं.

कार के आधुनिक फ़ीचर्स इलेक्ट्रिक मोटर पर निर्भर करते हैं और इंजन को बंद करने से इन मोटर्स को करंट नहीं मिल पाता जिससे ये फ़ीचर्स अपना कार्य पाते। पॉवर स्टीयरिंग, ब्रेक्स, एयरबैग्स, ABS, स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसे कई महत्वपूर्ण फ़ीचर्स को इलेक्ट्रिसिटी चाहिए होती है और इसलिए इंजन स्विच ऑफ करना काफी ख़तरनाक साबित हो सकता है.

टर्बो ठंडा नहीं हो पाता

टर्बोचार्जेर्स वाली कार्स का अतिरिक्त ख़याल रखना पड़ता है. भले ही सभी डीजल इंजन टर्बोचार्ज किए गए हों, फिर भी कई पेट्रोल कार्स के इंजन भी टर्बोचार्ज्ड होते हैं. वाहन का उपयोग करने के बाद, टर्बो को ठंडा करने के लिए हमेशा इंजन को कुछ मिनट तक चलाए रखना चाहिए। ऐसा करने से यह सुनिश्चित होता है कि कूलिंग सिस्टम को टर्बोचार्जर के तापमान को कम कर के ठंडा करने और टर्बो-सिस्टम से ज़्यादातर एग्जॉस्ट गैसों को हटाने के लिए पर्याप्त समय मिलता है.

लो आरपीएम पर ऊँचे गियर में ड्राइव करना (इंजन लग्गिंग)

एक आम धारणा है कि कार को उच्च गियर में चलाने से उच्च माइलेज मिलेगा। जहाँ एक और ये बात सही है वहीं कई लोग लो आरपीएम पर ही ऊँचा गियर लगा लेते हैं. वाहन को ऊँचे गियर डाल कर धीमी स्पीड में चलाने से ट्रांसमिशन पर बुरा प्रभाव पड़ता है. ऊँचे गियर का मतलब है गियर पर कम खांचे होना, जिस से इंजन को राहत मिलती है पर लो गियर में एक्सेलेरेट करने की उतनी पॉवर नहीं होती और ज़बरदस्ती कोशिश करने से समय के साथ साथ कार के मेकेनिकल्स में गम्भीर नुक्सान हो सकता है.

ठंडे इंजन को रैव करना

एक ठंडे इंजन पर अधिक दबाव ना डालना महत्वपूर्ण है. इंजन में चिकनाई बनाए रखने वाला इंजन ऑइल को वांछित चिपचिपाहट प्राप्त करने से पहले एक निश्चित तापमान तक पहुंचने की आवश्यकता होती है. इंजन के ठंडे रहने पर इंजन ऑइल सारे पुर्ज़ों की ठीक से चिकनाई नहीं कर पाता जिस कारण इंजन में वक्त से पहले ही खराबियाँ उत्पन्न होने लगती हैं. मॉडर्न इंजनस को गरम होने में ज़्यादा समय नहीं लगता है. कुछ शुरूआती किलोमीटर्स के लिए वाहन को धीमी गत्ति पर चलाने से इंजन का सुनिष्चित तापमान बन जाता है.

कार को रोकने के लिए ‘P’ मोड का इस्तेमाल करना

कई लोग ऑटोमैटिक वाहनों को ‘P’ मोड या पार्किंग मोड की सहायता से रोकते हैं. पार्किंग मोड में हैंडब्रेक नहीं होता। इसके बजाए, यह सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसमिशन का उपयोग करता है कि कार पार्क होने पर नहीं चल रही है. यहां तक ​​कि ऑटोमैटिक कार्स में भी हैंडब्रैक होते है क्योंकि कार को “पी” मोड में डालना और हैंडब्रैक का उप्योग करना दो अलग चीज़ें हैं. हैंडब्रैक कार के ब्रेक का उपयोग करके उसे रोकता है. हमेशा सुनिष्चित करें की “P” मोड में डालने से पहले वाहन पूरी तरह से रुक चुका है.

कार को चलाते चलाते अचानक रिवर्स मोड में डाल देना

यह समझना जरूरी है कि कार को पूरी तरह रोके बिना रिवर्स गियर लगा देने के कठोर परिणाम हो सकते हैं. कई लोगों को कार को आगे की और चलाते वक्त अचानक रिवर्स ट्रांसमिशन में डाल देने की आदत होती है. कार्स में रिवर्स गियर लगाने पर एक तीसरा छोटा गियर जिसे ‘आईडलर ‘ भी कहा जाता है कार्य में आ जाता है. यह गियर की गति की दिशा को बदलता है, जिस से कार पीछे की ओर चलने लगती है. चलती हुई कार में रिवर्स गियर लगा देने पर गियर की ग़रारी बुरी पिस जाती हैं जिस से ट्रांसमिशन को बहुत नुक्सान हो सकता है.

तेज़ स्पीड में लोअर गियर पर शिफ्ट करना

जहाँ हाईवे पर ओवरटेक करने के लिए हम गियर को डाउनशिफ़्ट करते हैं वहीं तेज़ रफ़्तार में ऐसा करते वक्त कुछ गियर्स कूद जाने से इंजन और ट्रांसमिशन पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं. लोअर गियर पर शिफ्ट करने से इंजन की स्पीड अचानक बढ़ जाती है जो कार के लिए काफी ख़तरनाक साबित हो सकता है. इंजन को हाई आरपीएम से बचाने के लिए निर्माता कार में इंजन-कटऑफ सेंसर्स लगाते हैं. यदि इंजन की गति एक निश्चित आरपीएम तक पहुंच जाती है तो इंजन कट-ऑफ हो सकता है और कुछ मामलों में कार पूरी तरह से रुक सकती है. यह व्हील स्पिन का कारण भी बन सकता है और वाहन बेकाबू हो कर संतुलन खो सकती है.

ख़राब सड़कों और ब्रेकर्स पर वाहन की रफ़्तार कम नहीं करना

नियमित कार का सस्पेंशन हर समय काम करता है. सबसे स्मूथ रोड्स पर भी कार का सस्पेंशन कार तथा सवारियों को स्थिर रखने के लिए लगातार काम करता रहता है. लेकिन अगर ऊबड़खाबड़ सड़कों पर चला रहे हैं तो इस सस्पेंशन सिस्टम को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है. हमेशा ख़राब सड़कों पर अपनी कार को हलके चलाएं जिस से आपकी कार सस्पेंशन को अवशोषित करने के लिए अधिक समय मिलता है.

यही बात स्पीड ब्रेकर्स और गद्दों के लिए भी लागू होती है. जब भी आपको कोई स्पीड ब्रेकर या गहरा गड्डा दिखाई देता है तो आप हमेशा उस से अपनी कार बचाते वक्त अपनी रफ़्तार कम करने की भी कोशिश करें। ख़राब सतहों पर स्लो और स्मूद ड्राइविंग से कार में जल्द ही आजाने वाली खड़खड़ाहट भी दूर रहेगी।

सही समय पर सर्विस नहीं कराना

कार्स में कई पेचीदा पुर्ज़े होते हैं जिन्हें काफी रिसर्च के बाद बनाया जाता है. वाहन में कई चलने वाले पुर्ज़े होते हैं जिन्हें नियमित स्नेहन और आवधिक प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है. कार निर्माता इन पुर्ज़ों के डिज़ाइन के अनुसार सेवा अवधि का निर्णय लेते हैं और इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

अगर किसी कार निर्माता ने 10,000 किलोमीटर या 1 साल की सेवा अवधि का उल्लेख किया है, तो ये सुनिश्चित करें कि आप अपने वाहन को निर्धारित सेवा के लिए ज़रूर लेकर जाएं। टाइमिंग बेल्ट जैसे अनिवार्यताएं सर्विस बुक के अनुसार बदलवानी चाहिए, अन्यथा कार की वारंटी रद्द हो जाती है और इसकी लाइफ भी कम हो जाती है.

टायर्स में कम हवा पर भी तेज़ चलाना

टायर सबसे दुर्व्यवहार से गुजरते हैं और हमें इन टायर्स की अत्यधिक देखभाल करनी चाहिए। लो टायर प्रेशर टायर और सड़क के बीच संपर्क क्षेत्र को बढ़ाता है और ईंधन दक्षता घटाने के अलावा, टायर ऐसी परिस्थितियों में फट सकता है. जब पर्याप्त टायर प्रेशर नहीं होता है तो टायर अधिक फ्लेक्स होता है और यह तेजी से गर्म हो सकता है और तेज़ स्पीड में फट सकता है. टायर प्रेशर पर निरंतर जांच रखना हमेशा अच्छा ख़याल है.