सेकंड हैण्ड कार खरीदने से पहले ये 10 बातें ज़रूर जान लें…

कहा जाता है की इंडिया का सेकिंड हैण्ड कार मार्केट नए कार मार्केट से 2.5 गुना बड़ा है. इसका मतलब है की कई कस्टमर नए कार की जगह सेकंड हैण्ड कार खरीदते हैं. सेकंड हैण्ड कार खरीदने के कई फायदे हैं लेकिन इसमें कई जोखिम भी हैं. इसलिए आक हम आपको सेकंड हैण्ड कार खरीदने के कुछ खतरों के बारे में बता रहे हैं ताकि जब आप सेकंड हैण्ड कार खरीदने जाएँ तो आपको बिना किसी दिक्कतों के एक अच्छी कार मिल सके.

चोरी की गाड़ी

सेकंड हैण्ड कार खरीदते वक़्त ज़्यादा सतर्क रहना ज़रूरी होता है. क्योंकि हो सकता है जो कार आप खरीदने जा रहे हों वो एक चोरी की गाड़ी हो. ऐसे कई मामले आये हैं जहां कार चोरों ने गाड़ी का इंजन और चेसी नम्बर बदलकर उसे फर्जी कागजात के साथ बेचने की कोशिश की है. हाल ही में दिल्ली पुलिस के एक टीम ने कुछ चोरों को पकड़ा था जो छोटे शहर के लोगों को ऐसी कार्स बेच रहे थे. ऐसे कार चोरों की पसंदीदा कार Toyota Fortuner है. ऊपर वाले तस्वीर में जो SUV आप देख रहे हैं वो इन्हीं कार चोरों से बरामद की गयी थी. ये बात पता चली थी की कुछ सेकंड हैण्ड कार डीलर्स ने इन चोरों को मार्केट के डिमांड के हिसाब से कार चुराने का ‘ऑर्डर’ दिया था. इसलिए सेकंड हैण्ड कार को हमेशा एक प्रमाणित डीलर से ही खरीदें.

एक्सीडेंट वाली गाड़ी

कई बार देखा गया है की ओनर्स एक बड़े हादसे की शिकार हुई गाड़ी को नवीनीकृत करा भोले-भाले कस्टमर्स को बेचने की कोशिश करते हैं. ऐसे गाड़ियां बिल्कुल भी नहीं खरीदनी चाहिए. एक बड़ा एक्सीडेंट कार के चेसी को गहरी चोट पहुंचाती है. कार वर्कशॉप ऐसी कार्स के पैनल को रिपेयर और इन्हें दुबारा से पेंट कर इन्हें बिल्कुल नया बना देते हैं. लेकिन डैमेज फ्रेम को रिपेयर नहीं किया जा सकता. इसलिए, हमेशा कार खरीदने से पहले इसे एक एक्सपर्ट मैकेनिक से चेक करवा लें. साथ ही हमेशा पहले के बीमा क्लेम को चेक कर लें की कहीं पहले इसका बड़ा एक्सीडेंट हुआ है या नहीं.

निर्माण डिफेक्ट वाली कार

अक्सर कार ओनर्स अपनी अविश्वसनीय कार्स को कौड़ियों के भाव बेचने की कोशिश करते हैं. इसलिए अगर आपको ऐसी डील मिल रही है जो काफी लुभावनी लगती है, हो सकता है उस कार के निर्माण में डिफेक्ट हो. ऐसी कार रखना बहुत बड़ी सिरदर्दी होती है, निर्माता ऐसी कार्स को रिप्लेस नहीं करते क्योंकि देश में ऐसा कोई क़ानून नहीं है. इसलिए ओनर्स ऐसी कार्स को बेचकर कम से कम कुछ पैसे वापस पाने की कोशिश करते हैं. इसलिए कार खरीदने से पहले उसकी सर्विस हिस्ट्री ज़रूर देखें. ऊपर आप एक नयी Jaguar XJ को कुछ गधों द्वारा खिंचते हुए देख सकते हैं. असल में एक इंडियन कारोबारी अपनी Jaguar से तंग आ गाय था और उसने विरोध के लिए ऐसा किया.

छोटी वारंटी

असल में सेकंड हैण्ड कार्स का वारंटी पीरियड लम्बा नहीं होता. ये सच बात है की कुछ कार्स में ऑप्शनल एक्सटेंडेड वारंटी मिलती है, लेकिन इसमें कई नियम और शर्तें लगे होते हैं. फिर भी इंडिया में अधिकांश कार निर्माता एक्सटेंडेड वारंटी ऑफर करते हैं जिसे ओरिजिनल वारंटी के खत्म होने से पहले खरीदा जा सकता है. एक्स्ट्रा वारंटी पीरियड खरीदना हमेशा अच्छा होता है क्योंकि इससे आप थोड़ा निश्चिन्त रहते हैं.

‘सस्ती’ एक्सोटिक कार्स जिनका मेंटेनेंस ज़्यादा होता है

ये बात मान भी लीजिये की हम कभी न कभी हम सब का मन करता है की एक लक्ज़री कार खरीदें. लेकिन हर कोई इतने पैसे खर्च नहीं कर सकता. इसलिए एक सेकंड हैण्ड लक्ज़री कार खरीदना एक अच्छा ऑप्शन है. ऊपर के फोटो में आप जो Mercedes-Benz C-Class देख रहे हैं वो सिर्फ 3.9 लाख रूपए में बिक रही है. और बस तुलनामात्र के लिए बता दें की एक नयी Renault Kwid 1.0 इससे महंगी है. इस्लिएय हमेशा याद रखें की ऐसी लक्ज़री कार्स खरीदना तो आसान है लेकिन इन्हें मैन्तियन करना मुश्किल. स्पेयर पार्ट्स और सर्विस चार्ज काफी महंगे होते हैं. और किसी को हाथी पालने का शौक तो होता नहीं.

स्पेयर पार्ट्स की दिक्कत वाली पुरानी गाड़ियाँ

जिन कार्स का प्रोडक्शन बंद हो चुका है उनके स्पेयर पार्ट्स मुश्किल से मिलते हैं. और ये और भी मुश्किल तब हो जाता है जब निर्माता ने देश में अपना कारोबार समेट लिया हो. उदाहरण के लिए ऊपर जो Chevrolet Captiva आप देख रहे हैं वो एक अच्छी कार है, लेकिन इसे सर्विस या रिपेयर कराना अब उतना आसान नहीं रहा क्योंकि कंपनी इंडियन मार्केट से जा चुकी है. ऐसी कार को मेन्टेन करने में काफी पैसे खर्च होते हैं. स्पेयर पार्ट्स भी मुश्किल से ही मिलते हैं. और ऐसी कार्स ना खरीदें जिनका लाइफ साइकिल खत्म होने वाला है, मसलन दिल्ली में 10 साल से पुराने डीजल कार्स रोड पर नहीं चल सकतीं. और पेट्रोल कार्स के लिए ये सीमा 15 साल है.

रफ हैंडलिंग वाली कार्स

कई लोग कार खरीदने के एक या दो साल बाद ही उसे बेच देते हैं. ऐसे लोग कार को लम्बे समय तक रखने के इरादे से नहीं खरीदते हैं. इसलिए वो इसे काफी रूखे तरीके से हैंडल करते हैं. और ऐसे में कार की लाइफ कम होती है. इसलिए हमेशा सुनिश्चित कर लें की आप एक बुरी तरह से हैंडल की हुई कार नहीं खरीद रहे हैं. इसे खरीदने से पहले एक मैकेनिक से ज़रूर चेक करवा लें.

ज़ंग

ऐसे कार्स जिनमें थोडा भी ज़ंग लगा हो उसे काफी दूर रहें. ज़ंग आसानी से दिखती नहीं खासकर बॉडी के छुपे हुए हिस्सों में. कोई भी ऐसी कार जिसमें ज़ंग लगा हो, वो एक अच्छी देला नहीं होती. देश के तटीय इलाकों के कई कार्स में ऐसी दिक्कत आती है. इसलिए कार खरीदने से पहले उसे ज़ंग के लिए ज़रूर जांच लें.

420 सेलर

कई कार बेचने वाले अंत में फ्रॉड निकलते हैं. हाल ही में एक मामला आया था जहां एक Audi ओनर ने किसी को कार बेचकर उससे कार वापस चुरा ली. इसलिए हमेशा ध्यान रखें की आपके पास दोनों चाबियाँ हों. साथ ही सेलर को पैसे तभी दें जब कागज़ का सारा काम खत्म हो गया हो और आप पूरी तरह से संतुष्ट हों. कार के पुलिस सत्यापन कराना एक अच्छा कदम हो सकता है.

पुलिस केस

कई कार ओनर्स किसी संगीन अपराध में फंसे कार्स से अपना पीछा छुड़ाना चाहते हैं. ये मामले आमतौर पर हिट-एंड-रन या ड्रग्स तस्करी के होते हैं. इसलिए ये गाड़ियां पुलिस के नज़र में रहती हैं. इसलिए एक सेकंड हैण्ड कार खरीदने से पहले पुलिस से उसका सत्यापन ज़रूर करा लें.

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