11.35 करोड़ की Rolls Royce Phantom VIII के बारे में 10 बातें जो आपको जाननी चाहिए…

Rolls Royce हमेशा से ही अपने बेहद लक्ज़रीयस फ़ीचर्स के लिए जानी गयी है. इस साल के शुरुआत में ब्रिटिश कार निर्माता ने इंडिया में Phantom Series VIII लॉन्च की, जो एक बिल्कुल नया मॉडल है और गगनचुम्बी 11.35 करोड़ रूपए है. ये बात इसे इंडिया की सबसे महंगी गाड़ी बनाती है. पेश हैं Rolls Royce Phantom VIII के बारे में 10 आश्चर्यजनक बातें जो इसे मार्केट की सबसे महंगी गाड़ी बनाते हैं.

Spirit of Ecstasy कार के साथ ही रहती है

आपने कई कार्स को देखा होगा, खासकर हाई-एंड मॉडल्स को, की उनपर बैज नहीं है! अक्सर ये बैज इसलिए नहीं होते हैं क्योंकि उन्हें एक वक़्त पर चुरा किया गया था. ग्रे मार्केट में चोरों को ऐसे बैज की अच्छी कीमत मिलती है. अच्छी खबर ये है की Phantom VIII के Spirit of Ecstasy को चुराना नामुमकिन है. इसके हुड ओरनामेंट में स्प्रिंग वाला मैकेनिज्म होता है जो हलके फ़ोर्स पर भी ‘Flying Lady’ को रेडियेटर ग्रिल के अन्दर डाल देता है.

ऑटोमैटिक दरवाज़े

Rolls Royce Phantom VIII में सभी दरवाज़ों के लिए टच-सेंसिटिव डोर सिस्टम है. कंपनी का कहना है की इस फ़ीचर से ड्राईवर डोर हैंडल पर एक सेंसर को छू कर दरवाजों के आटोमेटिक व्हिस्परिंग क्लोज फीचर को इस्तेमाल कर सकता है. और, कार के मशहूर सुसाइड रियर डोर्स इसके लेटेस्ट मॉडल में अभी भी उपलब्ध हैं.

इसमें “Gallery” है

नयी 2018 Rolls Royce Phantom VIII में अपनी एक ‘गैलरी’ भी है. नए Phantom का डैशबोर्ड ग्लास के अन्दर है जो किसी महंगी पेंटिंग या कला के हिस्से का डिस्प्ले बन सकता है. असल में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट पैनल, ड्राईवर असिस्ट सिस्टम, और नेविगेशन इंस्ट्रक्शन जैसे साड़ी चीज़ें ग्लास के एक हिस्से के पीछे हैं जो डैशबोर्ड के एक हिस्से से दूसरे तक जाता है.

गियर भी सेटेलाइट की मदद से बदलता है

Phantom VIII का 6.75 लीटर V12 इंजन पॉवर को रियर व्हील्स तक ZF से लिए गए 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स द्वारा भेजता है. इस गियरबॉक्स में एक GPS रिसीवर है जो कार के स्पीड और लोकेशन को देखते हुए गियरशिफ्ट के टाइम को बदलता है. एक डायनामिक ट्रांसमिशन जो रोड के हालत के हिसाब से गियर बदले, अब समझे आप इतने पैसे क्यों खर्च कर रहे हैं?

आप घडी की सुई की आवाज़ सुन सकते हैं

Phantom VIII के अन्दर बैठे लोग बाहर की दुनिया के शोर से दूर रहते हैं. इसके केबिन में 130 किलो साउंड कम करने वाला मटेरियल लगा है. Rolls Royce का दावा है की Phantom VIII दुनिया की सबसे शांत मोटर कार है. नए Phantom के टायर्स भी रोड के शोर को पहले से 9 डेसिबल ज्यादा कम करते हैं. अन्दर इतनी शान्ति होती है की घडी के टिक-टिक के चलते आपको इंजन की आवाज़ सुनाई नहीं देती.

बारीकियों पर ध्यान

लेटेस्ट Phantom VIII का प्लश इंटीरियर किसी लक्ज़री याट से कम नहीं. इसका ओवरआल वातावरण काफी क्लासी है और इसके हर इंच पर आपको सबसे अच्छी चीज़ों का काम मिलेगा. इसके अपहोल्सट्री के लिए सिर्फ बैल के चमड़े का इस्तेमाल किया जाता है. गाय का लेदर इसलिए नहीं इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि बछड़ों को जन्म देते वक़्त गाय के स्किन पर स्ट्रेच मार्क्स आते हैं और Rolls Royce नहीं चाहती की ये Phantom पर दिखे. कंपनी को एक Phantom के इंटीरियर को पूरा करने में 17 दिनों तक का समय लगता है. और अन्दर आप जो वुड का विनियर काम देख रहे हैं वो नमी भरे चैम्बर्स से आता है ताकि उसमें छोटे से छोटा दरार भी ना आये. और इसे लगाने से पहले सिर्फ वेलवेट पर रखा जाता है ताकि इसपर खरोंच ना आये.

हाथ से बनी

कहा जाता है की Rolls Royce के फैक्ट्री में सिर्फ 4 रोबोट हैं. इनमें से दो को कार पर प्राइमर कोट लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. और अधिकांश काम हाथ से किया जाता है जो आज मास प्रोडक्शन वाले कार्स की दुनिया में अनदेखा सा है. और Rolls Royce मास प्रोडक्शन कार नहीं है. एक पूरे साल में बस 500 ऐसी कार्स बन सकती हैं. जहां कार निर्माता पिनस्ट्राइपिंग के लिए स्टीकर्स का इस्तेमाल करते हैं, Rolls Royce पिनस्ट्राइप्स को गिलहरी के बालों वाले ब्रश से पेंट करती है! खैर, इसका नया 6.75-लीटर V12 इंजन भी तो हाथ से ही बना होता है!

अपनी नायाब पहचान

दो Phantom VIIIs कभी भी एक जैसे नहीं होते. असल में हर पार्ट्स के लिए अनेकों ऑप्शन होते हैं जिन्हें कस्टमाईज़ किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, आप 44,000 एक्सटीरियर पेंट ऑप्शन में से चुन सकते हैं. Rolls Royce आपके रुचि, पसंदीदा स्पोर्ट्स, और जगहों को देखता है और उसके हिसाब से इंटीरियर को कस्टमाईज़ करता है. ये आपके लिए कस्टम छाता भी चुनता है. ऊपर के फोटो में जो बरगंडी-वाइट रंग का इंटीरियर आप देख रहे हैं, वो हज़ारों में से एक कलर है जो आप चुन सकते हैं.

सालों-साल चलती है

पहली Rolls Royce 1904 में बनी थी. तब से लेकर अब तक इन कार्स का कुल 65% अभी भी रोड पर चलने लायक हैं. ये दिखाता है की इन कार्स की बिल्ट क्वालिटी कितनी अच्छी होती है. साथ ही कई ओनर्स जो अपने कार्स से इतने प्यार होता है की वो अपनी पूरी ज़िन्दगी एक ही मॉडल के साथ बिताना चाहते हैं. और ये तभी संभव है जब कार लम्बे समय तक टिके.

इसके जैसा कोई नहीं

ये जानी-मानी बात है की जब कार तेज़ रफ़्तार पर चल रही होती है तब भी Phantom के अलॉय व्हील कैप्स पर लगे RR बैज सीधे होते हैं. ये उन कई चीज़ों में से एक है जो दिखाता है की इस कार के डिटेल्स पर कितना ध्यान दिया गया है. ऐसे फ़ीचर्स के चलते ही Rolls Royce इतनी स्पेशल बनती है.