इंडिया में बड़ी, महंगी बाइक्स चलाने में आपको ये 10 दिक्कतें आती हैं…

हम साल 2018 में रह रहे हैं, और इंडिया में हाई एंड मोटरसाइकिल्स की कोई कमी नहीं है. Harleys से Ducatis, Triumphs से MV Agustas इंडिया में लगभग हर बड़ा सुपरबाइक निर्माता मौजूद है. देश में तेज़ी से होते विकास और लोन मिलने की आसानी के चलते कई राइडर्स अब हाई एंड मोटरसाइकिल्स खरीदना पसंद कर रहे हैं. लेकिन बड़ी बाइक्स चलाने के अपने अलग रिस्क होते हैं. पेश हैं ऐसे ही 10 रिस्क.

अधिकांश बड़ी बाइक्स रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए आरामदायक नहीं होती

गज़ब के टॉर्क और आरामदायक राइडिंग पोजीशन वाले क्रूज़र्स भी इंडिया में रोज़ के इस्तेमाल के लिए आरामदायक नहीं होते. अगर आप शहर में चलते हुए आराम की तलाश में हैं तो आम सी Activa ही काफी है. बड़ी बाइक्स ट्रैफिक में बहुत जल्दी गर्म होती हैं. धीरे-धीरे चलता ट्रैफिक और मौसम की मार हाई-एंड बाइक को आपपर एक बोझ बना देती है.

पैसा तो है, लेकिन काबिलियत है?

जैसा की हमने पहले कहा, बड़ी बाइक खरीदना पहले से बेहद आसान हो गया है. लेकिन, उन्हें सुरक्षित तरीके से चलाना 95% राइडर्स को नहीं आता. आपको इसे अच्छे से राइड करने को सीखने के लिए ट्रैक स्कूल जाना होगा. और हाँ, आपको धीरज एवं अनुभव की भी ज़रुरत होगी. 150 सीसी बाइक से अचानक 600 सीसी बाइक पर शिफ्ट करना खतरनाक हो सकता है. लेकिन अधिकांश राइडर्स को ये बात तब तक समझ नहीं आती जब तक कोई दिक्कत ना हो जाए.

इंडिया के रोड दोगुने खतरनाक हैं

इतने सारे पॉवर को हैंडल करने के लिए बस दो चक्के होने के चलते, उच्च क्षमता वाले बाइक्स सीमित एक्सीलीरेशन और स्पीड वाले छोटे बाइक्स के मुकाबले ज़्यादा खतरनाक होते हैं. और ये सब ट्रैक्शन कण्ट्रोल, राइडिंग मोड, और ABS जैसी सुविधाओं के होने के बावजूद होता है. बड़े बाइक्स में छठे गियर को लगाने के लिए भी आपको आमतौर पर 80 किमी/घंटे से तेज़ रफ़्तार पर चलना होगा. और इंडिया में ये आमतौर पर 2-व्हीलर्स की स्पीड लिमिट से ज़्यादा होता है. अगर आप एक खुली सड़क पर 120 किमी/घंटे की रफ़्तार पर चल रहे हैं तो कोई भी छोटा जानवर या बाधा आपके संतुलन की ऐसी की तैसी कर सकता है.

और अगर आपने गलती नहीं की है, फिर भी दोष आपको ही दिया जाएगा

चूंकि कई अपरिपक्व लोग आज आसानी से बड़ी बाइक्स खरीद ले रहे हैं, रोड पर इनकी अपरिपक्वता कई एक्सीडेंट्स का कारण बन रही है. जिससे आम जनता के बीच धारणा बन गयी है की बड़ी बाइक्स चलाने वाले लोग हमेशा रैश ड्राइविंग करते हैं. और हमेशा तेज़ चलने वाले एवं बड़े साइलेंर्स वाले राइडर्स इस धारणा को और पुख्ता करते हैं. इसलिए अगर कभी अनहोनी हो जाए, हमदर्दी की ज़्यादा उम्मीद ना रखें. और हो सकता है की आपकी गलती भी ना हो, लेकिन अगर दोष आपको दिया जाए, तो चौंकिए या आक्रामक मत हों, दिमाग का इस्तेमाल कर मामले को सुलझाएं.

और लगभग सारे पुलिसवाले आपको ‘स्ट्रीट रेसर’ समझेंगे

इंडिया में पुलिसकर्मी आमतौर पर बड़े बाइक राइडर्स को ज़्यादा पसंद नहीं करते. वो उन्हें सिर्फ इसलिए शक की निगाह से दखते हैं क्योंकि ये बाइक्स थोड़ा अलग दिखती हैं. और चूंकि स्पीड लिमिट से ऊपर चलने वाले बेवकूफों की कमी नहीं है, हर बड़ी बाइक वाले राइडर को स्ट्रीट रेसर समझ लिया जाता है. इस नज़रिए को बदलने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन तब तक के लिए संभल के रहना की सही है.

मेंटेनेंस का खर्च तो आपको पता ही है

अगर आपको लग रहा है की 8 लाख रूपए की सुपरबाइक को एक कॉम्पैक्ट सेडान या हैचबैक के मुकाबले मेन्टेन करना ज़्यादा आसान होगा क्योंकि वो छोटी है, एक बार दुबारा सोचिये. आप सुपरकार के समकक्ष दो चक्कों वाली बाइक चला रहे हैं, और सुपरकार्स को चलाना सस्ता नहीं होता. हर 10-12 हज़ार किलोमीटर पर टायर बदलने से लेकर C-सेगमेंट सेडान से महंगे सर्विसिंग तक, इन बाइक्स को मेन्टेन करना एक खर्चीला काम होता है.

सर्विसिंग भी एक झंझट है

अगर आप पैसे खर्च करने को भी तैयार हैं, टॉप क्लास सर्विस की उम्मीद मत रखिये. अधिकांश सुपरबाइक मैकेनिक ऐसे होते हैं जो 150 सीसी बाइक के बाद सीधे 1000 सीसी बाइक्स बनाते हैं. जहां कुछ लोगों को अच्छी जानकारी होती है, कुछ के लिए आपकी बाइक एक्सपेरिमेंट बन जाती है. और इसलिए इस बात को सुनिश्चित कर लें की इन बाइक्स पर आप कहीं टकरा ना जाएँ. इन्हें रिपेयर करना बेहद मुश्किल होता है.

और फिर आती है पार्ट्स की दिक्कत

अधिकांश बड़ी बाइक्स इंडिया में नहीं बनती, इसका मतलब है की इनके पार्ट्स इम्पोर्ट किये जाते हैं. जहां अधिकांश सर्विस सेंटर रूटीन रिपेयर के लिए आम पार्ट्स को स्टॉक करते हैं, एक्सीडेंटल रिपेयर के लिए ज़रूरी सामान को विदेश से इम्पोर्ट किया जाता है. इसलिए अगर आपने पार्किंग एरिया में भी बाइक गिरा दी तो उससे 6 महीने के लिए हाथ धो सकते हैं.

बीमा वाले चतुर होते जा रहे हैं

चूंकि बहुत सारे पैसे वाले लोग बिना सोचे समझे हाई परफॉरमेंस बाइक्स खरीद ले रहे हैं, टक्करों की संख्या बढती जा रही है. और बीमा वाले सुपरबाइक क्रैश में गहरी पड़ताल करते हैं और क़ानून के पालन के सत्यापन के लिए मशक्कत करते हैं. कुल मिलाकर आप इस बात की उम्मीद नहीं रख सकते की तेज़ रफ़्तार पर क्रैश करने के बावजूद आपको बीमा चलें बचा लेगी.

अनचाहा अटेंशन

ये शायद एक कारण भी है की इंडिया में लोग सुपरबाइक्स क्यों खरीदते हैं. उन्हें सबका ध्यान चाहिए. जहां इस बात में कोई बुराई नहीं है, लेकिन दिक्कत आपको तब होगी जब आप पार्किंग करने जायेंगे. अगर आपके पास सिक्योर पार्किंग नहीं है तो आपको पार्किंग के दौरान अपनी बाइक के डैमेज होने का डर सताता रहेगा. और फिर राइडिंग के दौरान लोग आपके बाइक को पास से देखने की कोशिश करेंगे, और कुछ लोग सुपरबाइक की रफ़्तार देखने के लिए आपको सड़क पर चैलेंज भी करेंगे.

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